गुवाहाटी 21 जून। असम के गुवाहाटी एयरपोर्ट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट पकड़ने आई एक युवती पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर पड़ी। उसके हावभाव, बातचीत के लहजे और अजीब हरकतों को देखकर सुरक्षाकर्मियों को तुरंत भांप गए कि कुछ तो बहुत बड़ी गड़बड़ है।
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जब सुरक्षा एजेंसियों ने मनोवैज्ञानिक तरीके (Psychological Method) से उससे पूछताछ शुरू की, तो उसने जो सच उगला… उसे सुनकर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में इसकी जानकारी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और स्थानीय पुलिस से साझा की गई, जिसके बाद असम से लेकर दिल्ली तक खलबली मच गई।
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आधार कार्ड देखते ही उड़े अधिकारियों के होश
संदेह के आधार पर जब सुरक्षाकर्मियों ने उस संदिग्ध युवती की सघन तलाशी ली, तो उसके पास से पश्चिम बंगाल के पते पर बना एक आधार कार्ड बरामद हुआ। कड़ाई से पूछताछ करने पर महिला ने कुबूल किया कि वह भारत की नागरिक नहीं है, बल्कि त्रिपुरा के रास्ते अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। वह सुरक्षा एजेंसियों और कई राज्यों की सीमाओं को चकमा देते हुए असम तक पहुंच गई थी।
आधी रात ‘सेफ हाउस’ पर धावा, 14 और गिरफ्तार
लड़की से मिले इनपुट्स के बाद असम पुलिस ने बिना एक पल गंवाए गुवाहाटी के एक गुप्त ठिकाने पर आधी रात को धावा बोल दिया। इस मेगा सीक्रेट ऑपरेशन में पुलिस ने एक ही जगह छिपकर बैठे 14 अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को रंगे हाथों दबोच लिया। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए ये सभी आरोपी बांग्लादेश के ‘खुलना’ जिले के रहने वाले हैं। फिलहाल इन्हें रूपनगर स्थित पुलिस कैंप में रखकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
खुलासा: गुवाहाटी बना घुसपैठियों का ‘लॉन्च पैड’
सुरक्षा एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में घुसपैठ का एक बेहद डरावना और सुनियोजित पैटर्न सामने आया है:
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स्टेप 1: घुसपैठिए सबसे पहले पश्चिम बंगाल और मेघालय के दावकी सेक्टर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हैं।
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स्टेप 2: सीमा पार करने के बाद वे सीधे गुवाहाटी पहुंचते हैं, जिसे एक ‘लॉन्च पैड’ या ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
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स्टेप 3: यहाँ ये लोग कुछ दिन ‘सेफ हाउस’ में ठहरते हैं, जाली भारतीय दस्तावेज (जैसे फर्जी आधार कार्ड) तैयार करवाते हैं।
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स्टेप 4: इसके बाद ट्रेन या फ्लाइट के जरिए देश के अन्य बड़े महानगरों के लिए रवाना हो जाते हैं।
देश के कई महानगरों में फैल चुका है नेटवर्क
अधिकारियों के मुताबिक, इस खतरनाक रैकेट की जड़ें असम और पश्चिम बंगाल से लेकर बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक फैल चुकी हैं। इस रास्ते से निकले कई घुसपैठिए पहले ही इन महानगरों में कंस्ट्रक्शन साइट्स, राजमिस्त्री, घरेलू कामकाज और दिहाड़ी मजदूरी के भेष में छिप चुके हैं। अब असम पुलिस की बॉर्डर विंग इन सभी की पहचान सत्यापित करने और इन्हें वापस डिपोर्ट करने की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। साथ ही, असम के अलग-अलग इलाकों में छिपकर बैठे अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
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