Home » छत्तीसगढ़ » छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: सीवर-सेप्टिक टैंक में बिना सुरक्षा उतरे तो नपेंगे अफसर, हर जिले में बनेगी ‘इमरजेंसी सैनिटेशन यूनिट’

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: सीवर-सेप्टिक टैंक में बिना सुरक्षा उतरे तो नपेंगे अफसर, हर जिले में बनेगी ‘इमरजेंसी सैनिटेशन यूनिट’

Share:

रायपुर 1 जून । छत्तीसगढ़ सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाले हादसों और सफाई कर्मियों की दर्दनाक मौतों को रोकने के लिए अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों के लिए कड़े और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

नए आदेश के मुताबिक, अब बिना आधुनिक मशीनों, पुख्ता सुरक्षा उपकरणों और उचित प्रशिक्षण के किसी भी सफाईकर्मी को सीवर या सेप्टिक टैंक के भीतर नहीं उतारा जाएगा। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई होगी, बल्कि हादसे की स्थिति में उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही (Personal Accountability) तय कर सीधे मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

Advt

असुरक्षित सफाई पर पूरी तरह रोक, तैयार होगा डिजिटल डेटाबेस

नगरीय प्रशासन विभाग ने माना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरने से सफाई कर्मियों की मौत और गंभीर चोटों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाने के // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// निर्देश दिए हैं:

  • श्रमिकों का डिजिटल सर्वे: प्रत्येक नगरीय निकाय को अपने क्षेत्र में सीवर, सेप्टिक टैंक और भूमिगत जल निकासी (Underground Drainage) से जुड़े सभी सफाईकर्मियों का सर्वे कर एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करना होगा।

  • अनौपचारिक श्रमिकों को भी सुरक्षा: इस डेटाबेस में केवल नियमित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि संविदा (Contractual), दैनिक वेतनभोगी और अनौपचारिक/निजी तौर पर काम करने वाले श्रमिक भी शामिल किए जाएंगे।

  • दस्तावेज विहीन लोगों पर रोक: किसी भी ऐसे व्यक्ति या श्रमिक को जोखिमपूर्ण कार्य में लगाने पर पूरी तरह रोक रहेगी, जो पंजीकृत नहीं है या जिसके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं।

हाथ से मैला उठाने (Manual Scavenging) की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध

विष्णु देव सरकार  ने साफ कर दिया है कि ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मकारों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य निर्देश: सभी नगरीय निकायों को लिखित में यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में हाथ से मैला उठाने या बिना सुरक्षा के सीवर में उतरने की प्रथा पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

लापरवाही पर सीधे नपेंगे कमिश्नर और सीएमओ

इस नए आदेश का सबसे कड़ा और महत्वपूर्ण पहलू अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।

  • यदि किसी भी नगरीय निकाय क्षेत्र में असुरक्षित सफाई, गंभीर चोट या किसी सफाईकर्मी की मौत का मामला सामने आता है, तो वहां के नगर निगम आयुक्त (Commissioner) या मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।

  • इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और गंभीर कदाचार माना जाएगा, जिसके तहत विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा।

पीपीई किट, बीमा और ‘नमस्ते’ योजना अनिवार्य

सफाई मित्रों की जिंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने सुरक्षा चक्र तैयार किया है:

  • नमस्ते (NAMASTE) योजना: इसके तहत सभी पात्र सफाईकर्मियों का अनिवार्य रूप से पंजीयन कराया जाएगा।

  • अनिवार्य सुरक्षा उपकरण (PPE Kit): सफाई के दौरान हेलमेट, दस्ताने, गमबूट, सुरक्षा हार्नेस, मास्क और विशेष सुरक्षा सूट पहनना अनिवार्य होगा। पीपीई किट का उपयोग न करना सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

  • सामाजिक सुरक्षा: सभी सफाईकर्मियों को स्वास्थ्य कवरेज, समूह दुर्घटना बीमा (Group Accident Insurance) और अन्य सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।

बिना लिखित अनुमति और प्रशिक्षण के काम पर पाबंदी

  • प्रमाणित कर्मी ही करेंगे काम: सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई केवल वही कर्मी कर सकेंगे जो पूरी तरह प्रशिक्षित, पंजीकृत और प्रमाणित हैं।

  • पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक: किसी भी संकरे या अत्यधिक जोखिम वाले स्थान (Confined Space) में सफाई के लिए नगरीय निकाय से पहले लिखित अनुमति लेनी होगी।

  • ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई: यदि कोई निजी ठेकेदार या एजेंसी अप्रशिक्षित या बिना उपकरणों के श्रमिकों को काम पर लगाती है, तो उसका टेंडर/अनुबंध तुरंत निरस्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और कानूनी केस दर्ज होगा।

शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1100 और जिला स्तर पर इमरजेंसी यूनिट

  1. शिकायत निवारण: असुरक्षित सफाई या हाथ से मैला उठाने से जुड़ी शिकायतों के लिए ‘निदान पोर्टल’ और राज्य की हेल्पलाइन 1100 का व्यापक प्रचार किया जाएगा। हर निकाय में एक ‘सफाई सुरक्षा नोडल अधिकारी’ तैनात होगा।

  2. इमरजेंसी रिस्पॉन्स सैनिटेशन यूनिट (ERSU): राज्य के प्रत्येक जिला मुख्यालय में एक ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स सैनिटेशन यूनिट’ का गठन किया जाएगा। यह यूनिट हाई-टेक जेटिंग मशीनों, सक्शन मशीनों और आधुनिक उपकरणों से लैस होगी, जो सीवर गैस रिसाव या किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाएगी।

सरकार का यह कदम राज्य में मशीनीकृत सफाई (Mechanized Cleaning) को बढ़ावा देने और ‘मैनहोल’ को पूरी तरह से ‘मशीनहोल’ में बदलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

 📍

Leave a Comment