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नेपाल में राजनीतिक भूकंप: प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा एक्शन, केपी ओली और रमेश लेखक गिरफ्तार

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काठमांडू: नेपाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन शाह ने शपथ लेने के मात्र 24 घंटे के भीतर एक बेहद कड़ा कदम उठाया। बालेन शाह सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिसके बाद दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

इन गिरफ्तारियों का मुख्य कारण जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन के दौरान बरती गई लापरवाही को बताया जा रहा है। बालेन शाह, जो स्वयं इस आंदोलन की उपज माने जाते हैं, ने सत्ता संभालते ही आंदोलनकारियों की मौत और हिंसा के मामलों में जवाबदेही तय करने का वादा पूरा किया है।

जांच रिपोर्ट का आधार: गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 8 सितंबर को हुई हिंसा के लिए ओली और लेखक को जिम्मेदार ठहराया है।

गंभीर आरोप: रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन के दौरान 77 लोगों की जान गई थी और करीब 85 अरब नेपाली रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

कानूनी कार्रवाई: दोनों नेताओं पर ‘मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017)’ के तहत मामला दर्ज किया गया है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो केपी ओली को 15 साल तक की जेल हो सकती है।

पूर्व प्रधानमंत्री का पक्ष

गिरफ्तारी से पहले केपी शर्मा ओली ने अपना बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को केवल जान-माल के नुकसान को रोकने और बाहरी तत्वों की घुसपैठ पर लगाम लगाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, आयोग ने पूर्व पुलिस प्रमुख को भी प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आदेश देने का दोषी पाया है।

नेपाल की राजनीति में बदलाव के संकेत

बालेन शाह की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार पुराने राजनीतिक समीकरणों को चुनौती देने और भ्रष्टाचार व लापरवाही के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने के मूड में है। इस घटनाक्रम से नेपाल के राजनीतिक भविष्य में बड़े बदलाव आने की संभावना है।

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