नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। अमेरिका स्थित ‘स्मिथसोनियंस नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट’ (NMAA) ने तमिलनाडु के मंदिरों से दशकों पहले चोरी हुई तीन बहुमूल्य प्राचीन मूर्तियों को भारत वापस सौंपने का निर्णय लिया है।
अवैध तस्करी की पुष्टि: यह ऐतिहासिक फैसला तब लिया गया जब संग्रहालय द्वारा किए गए विशेष शोध (Provenance Research) में यह साबित हो गया कि ये मूर्तियां अवैध रूप से भारत से बाहर ले जाई गई थीं। वाशिंगटन में भारतीय दूतावास की उप प्रमुख नामग्या खम्पा और संग्रहालय के निदेशक चेस रॉबिन्सन ने इन कलाकृतियों की वापसी के लिए एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
वापस आने वाली अनमोल विरासत:
-
शिव नटराज (9वीं सदी): चोल काल की उत्कृष्ट कांस्य प्रतिमा।
-
शिव एवं उमा (12वीं सदी): जिन्हें ‘सोमस्कंद’ के नाम से भी जाना जाता है।
-
संत सुंदरार और परवी (16वीं सदी): दक्षिण भारतीय भक्ति परंपरा के महान संत और उनकी पत्नी की प्रतिमा।
इतिहास और स्रोत: इनमें से ‘शिव-उमा’ और ‘संत सुंदरार’ की मूर्तियां 1987 में आर्थर एम. सैकलर द्वारा संग्रहालय को दान किए गए संग्रह का हिस्सा थीं। भारतीय दूतावास ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया है।
गुगल सर्च
-
प्राचीन मूर्ति वापसी (Antique Restitution)
-
तमिलनाडु सांस्कृतिक विरासत
-
चोल काल की मूर्तियां
-
स्मिथसोनियन संग्रहालय समझौता
-
भारत-अमेरिका सांस्कृतिक सहयोग
।।।








