तेहरान 23 मार्च : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर अपना दबदबा बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले चुनिंदा मर्चेंट जहाजों से 2 मिलियन डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम ‘ट्रांजिट फीस’ वसूल रहा है।
‘युद्ध की अपनी लागत होती है’ ईरानी सांसद अलाउद्दीन बोरुजेर्दी ने सरकारी मीडिया पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि “चूंकि युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए हम होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से यह शुल्क ले रहे हैं।” उन्होंने इसे ईरान की संप्रभुता और शक्ति के प्रदर्शन के रूप में पेश किया है। ईरान का दावा है कि यह ‘नया गवर्निंग रिजीम’ पिछले 47 वर्षों में पहली बार इस क्षेत्र पर उनके पूर्ण अधिकार को दर्शाता है।
ग्लोबल सप्लाई पर संकट और भारत को राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG यहीं से होकर गुजरता है। इस ‘ब्लॉकैड’ जैसी स्थिति और भारी वसूली के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं। हालांकि, ईरान ने अपनी रणनीति के तहत भारत और जापान जैसे देशों के जहाजों को रियायत दी है। हाल ही में भारत के दो LPG टैंकरों और एक पाकिस्तानी तेल टैंकर को सुरक्षित रास्ता दिया गया है।
डोनाल्ड ट्रम्प का अल्टीमेटम इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज के रास्ते को पूरी तरह और बिना किसी खतरे के नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर भीषण हमला करेगा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने धमकी दी है कि यदि उनके बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो वे इस रास्ते को ‘पूरी तरह’ बंद कर देंगे।








