रायपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने छत्तीसगढ़ में अपनी जड़ों को और गहरा करते हुए संगठनात्मक विस्तार की एक नई इबारत लिखी है। प्रदेश में संघ की शाखाओं का आंकड़ा अब 2188 तक जा पहुँचा है। हाल ही में हरियाणा के समालखा (पानीपत) में संपन्न हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के बाद, संघ अब छत्तीसगढ़ के बस्तर को लेकर एक बड़े ‘मास्टरप्लान’ पर काम कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
बस्तर: नक्सलवाद के बाद अब सामाजिक समरसता का मिशन

प्रतिनिधि सभा से लौटे क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना और प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा ने रायपुर में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि संघ का आगामी विजन बस्तर पर केंद्रित है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) जैसे-जैसे बस्तर नक्सलवाद के साये से मुक्त हो रहा है, संघ वहाँ सामाजिक समरसता और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति अपनाएगा। बैठक में न केवल स्थानीय मुद्दों बल्कि मणिपुर की स्थिति और पड़ोसी देशों (नेपाल, बांग्लादेश) के हालातों पर भी गहन मंथन किया गया।
आंकड़ों में संघ की ‘बड़ी छलांग’
प्रदेश के 1643 स्थानों पर संघ की सक्रियता है, जहाँ शाखाओं का संजाल बिछाया गया है। इन 2188 शाखाओं का विवरण कुछ इस प्रकार है:
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विद्यार्थी संयुक्त शाखाएं: 1246
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तरुण व्यावसायी शाखाएं: 482
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प्रौढ़ व्यावसायी शाखाएं: 192
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बाल शाखाएं: 144
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महाविद्यालयीन शाखाएं: 124
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में 833 साप्ताहिक मिलन, 155 वरिष्ठ स्वयंसेवक मिलन और 632 संघ मंडलियां भी सक्रिय हैं, जो निरंतर वैचारिक और सामाजिक कार्यों में जुटी हैं।
9 लाख लोगों तक पहुँच और शताब्दी वर्ष का लक्ष्य
संघ ने अपने 100 वर्षों की यात्रा और ‘पंच परिवर्तन’ के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाया, जिसके तहत 20,526 लोगों से सीधा संवाद किया गया। सांस्कृतिक एकता और धर्म जागरण के उद्देश्य से अब तक प्रदेश में 2034 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 9 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
रायपुर महानगर की बात करें तो इसे 14 नगरों में बांटकर 131 बस्तियों में 204 शाखाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं। संघ नेतृत्व का स्पष्ट कहना है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता को और अधिक प्रखर बनाया जाएगा।
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