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“मालगाड़ियों को हरी झंडी, यात्रियों को घंटों इंतजार”: संसद में गरजे कोरबा के सुर…

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▪️कोरबा का हक मार रहा रेलवे: 80% राजस्व देने के बाद भी यात्री सुविधाओं में ‘अंधेरगर्दी’ पर भड़कीं सांसद ज्योत्सना महंत!

कोरबा/नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान कोरबा लोकसभा की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेल बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कोरबा क्षेत्र के साथ हो रहे “सौतेले व्यवहार” पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र से रेलवे को सर्वाधिक राजस्व मिलता है, वहीं के यात्री बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

80% राजस्व फिर भी उपेक्षा क्यों? सांसद महंत ने सदन में आंकड़े रखते हुए सवाल किया कि जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) को अपने कुल राजस्व का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले कोरबा क्षेत्र से प्राप्त होता है, तो बजट में इस क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान क्यों नहीं किए गए? आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।उन्होंने दो टूक कहा, “जिस क्षेत्र से केंद्र का खजाना भरता है, उस क्षेत्र की जनता को न्याय मिलना ही चाहिए।”

पिटलाइन और नई ट्रेनों का मुद्दा: सांसद ने बताया कि कोरबा में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से बनी पिटलाइन धूल फांक रही है। उन्होंने मांग की कि इसे शीघ्र शुरू किया जाए, क्योंकि इसके बिना नई यात्री ट्रेनों का संचालन तकनीकी रूप से संभव नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ सरकार ‘वंदे भारत’ जैसी ट्रेनों के प्रचार पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं कोरबा के आम आदमी को लोकल ट्रेन के लिए 3 से 4 घंटे तक प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

10 साल से अधूरा कॉरिडोर और बंद पड़ी ट्रेनें: सांसद ने गेवरा-पेण्ड्रा रेल कॉरिडोर परियोजना के 10 वर्षों बाद भी अधूरे रहने पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि कोरबा-राउरकेला मार्ग पर पिछले 5 वर्षों से केवल मालगाड़ियां क्यों चल रही हैं? क्या इस क्षेत्र के नागरिकों को रेल यात्रा का मौलिक अधिकार नहीं है? इसके अलावा उन्होंने कोरबा से कटनी के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की भी पुरजोर मांग की।

मालगाड़ियों की गुलामी कर रहा यात्री विभाग: सांसद ने आरोप लगाया कि रेलवे अब केवल एक ‘व्यावसायिक संस्था’ बनकर रह गई है, जबकि इसे एक ‘लोक कल्याणकारी सेवा’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को घंटों आउटर पर खड़ा कर दिया जाता है, जो यात्रियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चाम्पा और सक्ती स्टेशनों पर गीतांजलि एक्सप्रेस एवं अहमदाबाद एक्सप्रेस के ठहराव की मांग भी दोहराई।

बिलासपुर से कोरबा तक हो ट्रेनों का विस्तार: क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से सांसद ज्योत्सना महंत ने मांग रखी कि नर्मदा एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और तिरुपति एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों को बिलासपुर में समाप्त न कर उनका विस्तार कोरबा तक किया जाए। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी होगी।


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