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बड़ी राहत: ईरान ने खोला होर्मुज जलडमरूमध्य ,समुद्र में लौटी रौनक,तेल की सप्लाई बहाल

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तेहरान: वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया है। इस फैसले के बाद हफ्तों से फंसे हजारों मालवाहक जहाजों के पहिए एक बार फिर घूम पड़े हैं, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों के खतरे पर लगाम लगने की उम्मीद है।


राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का शांति संदेश

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस तनाव को कम करने की पहल करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान का इरादा अपने पड़ोसी देशों पर हमला करने का बिल्कुल नहीं है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान में कहा:

“अगर पड़ोसी देश युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं, तो उन पर कोई हमला नहीं किया जाएगा।”

इस बयान के बाद क्षेत्र में पसरा सन्नाटा अब जहाजों के हॉर्न की आवाज में बदल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

समुद्र में लौटी रौनक: व्यापार के लिए खुला रास्ता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है। पिछले कुछ समय से युद्ध की आहट के चलते यहाँ ज्वालामुखी जैसा तनाव बना हुआ था। अब राष्ट्रपति के आश्वासन के बाद:

फंसे हुए जहाज: हफ्तों से लंगर डाले खड़े कार्गो जहाज अब अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।

व्यापारिक गतिविधियां: वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही शुरू होने से करोड़ों डॉलर का अटका हुआ व्यापार बहाल हो गया है।

बाजार में भरोसा: कंपनियों के बीच बना हुआ अनिश्चितता का माहौल अब कम हो रहा है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत के नजरिए से यह खबर काफी सुकून देने वाली है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास तेल और आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद था, जिससे देश में फिलहाल कोई संकट नहीं था। लेकिन मार्ग खुलने से:

1.आपूर्ति श्रृंखला: भविष्य में तेल की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा टल गया है। 2.कीमतों पर नियंत्रण: कच्चे तेल की ढुलाई सामान्य होने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। 3.निर्यात-आयात: समुद्री रास्ते से होने वाला भारत का अन्य व्यापार भी अब बिना किसी डर के जारी रह सकेगा।


निष्कर्ष: यदि ईरान अपनी इस प्रतिबद्धता पर कायम रहता है, तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।

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