Congress Inside Story : कांग्रेस आलाकमान द्वारा फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका देने का फैसला केवल एक सामान्य चयन नहीं है, बल्कि इसके पीछे छत्तीसगढ़ की आगामी राजनीति और सामाजिक समीकरणों की गहरी बिसात बिछी है। जानिए वे 3 बड़े कारण जिन्होंने फूलोदेवी के पक्ष में काम किया:
1. आदिवासी वोट बैंक और महिला कार्ड का मेल
छत्तीसगढ़ में आदिवासी मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। फूलोदेवी नेताम न केवल एक प्रभावी आदिवासी चेहरा हैं, बल्कि वे महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। पार्टी के सर्वे में यह बात सामने आई कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बेल्ट में पैठ बनाए रखने के लिए एक सशक्त महिला आदिवासी चेहरे को दोहराना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प है।
2. टीएस सिंहदेव और दीपक बैज के अपने समीकरण
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टीएस सिंहदेव: हालांकि सिंहदेव का कद बहुत बड़ा है, लेकिन दिल्ली दरबार में चर्चा थी कि उन्हें राज्य की सक्रिय राजनीति से दूर करना उचित नहीं है । उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
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दीपक बैज: वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। पार्टी का मानना है कि संगठन को अभी उनकी जमीनी स्तर पर अधिक जरूरत है। उन्हें चुनाव लड़वाने के बजाय चुनाव लड़वाने की जिम्मेदारी देना संगठन के हित में समझा गया।
3. ‘नॉन-कंट्रोवर्शियल’ और वफादार छवि
फूलोदेवी नेताम की छवि एक शांत और विवादों से दूर रहने वाली नेता की है। पार्टी के भीतर किसी भी गुट ने उनके नाम पर कड़ा विरोध नहीं जताया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए फूलोदेवी एक ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) विकल्प के रूप में उभरीं, जिस पर आलाकमान को सहमति बनाने में आसानी हुई।
4. संगठनात्मक निरंतरता
पार्टी इस समय किसी भी तरह के बड़े आंतरिक फेरबदल या असंतोष से बचना चाहती थी। फूलोदेवी का पिछला कार्यकाल बेदाग रहा है और संसद में उन्होंने स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इसी निरंतरता (Continuity) को बनाए रखने के लिए उन्हें रिपीट किया गया।
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