महासमुंद | जिले में पुलिस के ‘पुनर्वास अभियान’ और बढ़ते दबाव का बड़ा असर देखने को मिला है। प्रतिबंधित BBM (बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद) डिवीजन के 15 नक्सलियों ने एक साथ बलोदा थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं (9 महिला, 6 पुरुष) की संख्या है, जो नक्सली संगठन के भीतर टूटते भरोसे की ओर इशारा कर रही है।
क्यों बदला नक्सलियों का मन? (समर्पण के मुख्य कारण)
भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार, इन नक्सलियों ने मुख्य रूप से तीन कारणों से हथियार डाले हैं:
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खोखली विचारधारा: आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों का कहना है कि संगठन अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गया है और केवल शोषण का केंद्र बन गया है।
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कठिन जीवन और बीमारी: जंगलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, राशन की कमी और बीमारी के समय इलाज न मिलना उनके मोहभंग का बड़ा कारण बना।
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शासकीय नीति का आकर्षण: छत्तीसगढ़ शासन की ‘पुनर्वास नीति’ और बेहतर भविष्य की उम्मीद ने उन्हें मुख्यधारा की ओर मोड़ा।
रक्षित केंद्र में कड़ी सुरक्षा, होगी पूछताछ
पुलिस विभाग ने सभी 15 नक्सलियों को सुरक्षित वाहन से महासमुंद के रक्षित केंद्र (Police Lines) भेज दिया है। यहाँ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उनसे संगठन की कार्यप्रणाली, भविष्य की रणनीतियों और BBM कमेटी के अन्य सदस्यों के ठिकानों के बारे में विस्तार से पूछताछ करेंगे।
क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद
BBM कमेटी लंबे समय से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रही है। एक साथ 15 सक्रिय सदस्यों के हटने से इस बेल्ट में नक्सली नेटवर्क काफी कमजोर होने की संभावना है। जिला पुलिस इसे अपनी बड़ी रणनीतिक जीत मान रही है।
फैक्ट फाइल
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किसने किया सरेंडर: BBM कमेटी के 15 सदस्य।
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शक्ति संतुलन: 9 महिलाएं, 6 पुरुष।
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कहाँ पहुंचे: बलोदा थाना।
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अब कहाँ हैं: रक्षित केंद्र, महासमुंद।








