तेहरान/मिनाब 1 मार्च : दक्षिणी ईरान के मिनाब जिले से एक रूहं कांपने वाली खबर सामने आई है। शनिवार को एक प्राथमिक स्कूल पर हुए कथित अमेरिकी-इजरायली मिसाइल हमले ने शिक्षा के मंदिर को बच्चों की कब्रगाह में तब्दील कर दिया। इस हृदयविदारक घटना में अब तक 85 स्कूली छात्राओं की जान जा चुकी है, और मलबे में दबे होने के कारण मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने की आशंका है।
मलबे में दफन हुआ बचपन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब छात्राएं अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रही थीं। अचानक हुए एक जोरदार धमाके के साथ स्कूल की पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। स्थानीय निवासियों और बचाव दलों ने मलबे से बच्चियों को निकालने के लिए घंटों मशक्कत की, लेकिन कई मासूमों ने दम तोड़ दिया था।
हमले का घटनाक्रम: क्या है ईरान का दावा?
ईरानी मीडिया के दावों के अनुसार:
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यह हमला अमेरिका और इजरायल के एक साझा सैन्य अभियान का हिस्सा था।
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मिसाइल सीधे स्कूल की मुख्य इमारत पर गिरी।
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वर्तमान में 85 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों छात्राएं गंभीर रूप से घायल हैं।
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ईरान का आरोप है कि यह हमला गलती से नहीं, बल्कि जानबूझकर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर किया गया है।
वैश्विक तनाव और प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद ईरान में भारी रोष है। ईरान सरकार ने इसे ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ करार देते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
दूसरी ओर, अभी तक अमेरिका या इजरायल की ओर से इस विशिष्ट घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, पूर्व में दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि उनके निशाने पर केवल ईरान के सैन्य ठिकाने और परमाणु संस्थान हैं, आम नागरिक नहीं।








