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“दुख और तनाव में गलत निकल गए शब्द”: अमर्यादित बोल पर कैलाश विजयवर्गीय की सार्वजनिक सफाई, जताया ‘खेद’..विपक्ष का चौतरफा हमला

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इंदौर/भोपाल | इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों पर सवाल पूछने पर NDTV पत्रकार से उलझने वाले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अब अपने व्यवहार पर स्पष्टीकरण दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि उस समय उनके शब्द “गलत” थे।

मंत्री की सफाई: “मैं दो रातों से सोया नहीं हूँ”

कैलाश विजयवर्गीय ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया कि वे पिछले कुछ दिनों से बेहद मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने अपनी सफाई में निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:

  • जनता का दर्द: उन्होंने लिखा, “दूषित पानी से मेरे क्षेत्र के लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए। इस गहरे दुख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए।”

  • थकान और जिम्मेदारी: मंत्री ने बताया कि वे और उनकी पूरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए जमीनी स्तर पर हालात सुधारने में लगे हैं, जिसके कारण वे शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुके थे।

  • सार्वजनिक खेद: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अपने शब्दों के लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ।”

विवाद की जड़: “फोकट” और “घंटा” जैसे शब्दों का प्रयोग

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब NDTV के पत्रकार ने मंत्री जी से पूछा था कि क्या मौतों की जिम्मेदारी सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर डाली जाएगी या बड़े नेताओं की भी जवाबदेही तय होगी? इस पर विजयवर्गीय भड़क गए थे और उन्होंने पत्रकार को “फोकट के सवाल मत पूछो” और “घंटा” जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए चुप रहने को कहा था।

पत्रकारिता जगत और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

यद्यपि मंत्री ने खेद जता दिया है, लेकिन पत्रकार बिरादरी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि यह माफी केवल डैमेज कंट्रोल (Damage Control) की एक कोशिश है। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को संकट के समय और अधिक संयम बरतने की आवश्यकता होती है।

“जब तक सब स्वस्थ नहीं होते, शांत नहीं बैठूंगा”

अपने माफीनामे के अंत में विजयवर्गीय ने प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता अभी भी राजनीति नहीं, बल्कि इंदौर के लोगों की जान बचाना है। उन्होंने कहा, “जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूंगा।”

विपक्ष का चौतरफा हमला

जीतू पटवारी (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस): “शर्मनाक और संवेदनहीन”

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जब इंदौर में 11 से ज्यादा लोग दूषित पानी के कारण जान गंवा चुके हैं, तब एक जिम्मेदार मंत्री का यह कहना कि सवाल ‘फोकट’ के हैं, उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। पटवारी ने कहा, “मंत्री जी को ‘घंटा’ शब्द का उपयोग करने के बजाय अपनी प्रशासनिक विफलताओं पर जवाब देना चाहिए।”

कांग्रेस का ‘घंटा बजाओ’ प्रदर्शन

इस विवाद के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर और भोपाल में अनोखा प्रदर्शन किया। इंदौर के छावनी चौराहे पर कांग्रेसियों ने पीतल के घंटे बजाकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि यदि मंत्री जी को जनता के मुद्दों पर सवाल ‘घंटा’ जैसे लगते हैं, तो हम उन्हें यह घंटा उपहार में देते हैं ताकि वे नींद से जागें और जनता का दर्द समझें।

महिला कांग्रेस का मोर्चा

भोपाल में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने मंत्री विजयवर्गीय के बंगले का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हाथों में घंटियां लेकर नारेबाजी की और कहा कि एक मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से ऐसी भाषा का उपयोग करना यह बताता है कि उन्हें आम जनता के जीवन की कोई परवाह नहीं है।

अन्य विपक्षी दलों (AAP और RJD) का प्रहार

आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ शहर” (Indore) का दावा करने वाली सरकार लोगों को पीने का साफ पानी तक मुहैया नहीं करा पा रही है और जब पत्रकार जमीनी हकीकत दिखाते हैं, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है।

मुख्य मांगें:

  • इस्तीफे की मांग: विपक्ष ने मांग की है कि ऐसे अमर्यादित आचरण वाले मंत्री को तुरंत पद से हटा देना चाहिए।

  • सार्वजनिक माफी: हालांकि विजयवर्गीय ने बाद में ‘एक्स’ (Twitter) पर खेद जताया, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह माफी दिल से नहीं बल्कि अदालती और जन दबाव के कारण है।

  • न्यायिक जांच: इंदौर जल त्रासदी की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग तेज हो गई है।