बिहार 16 नवंबर : इस बार की बिहार विधानसभा में सबसे ज्यादा विधायक राजपूत जाति के ही चुने गए हैं.बिहार की आबादी में राजपूत जाति की हिस्सेदारी केवल 3.45 फीसदी है.और 35 विधायक चुने गए. वहीं बिहार की आबादी में 3.65 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली ब्राह्मण जाति के केवल 14 विधायक चुने गए हैं. इस बार की विधानसभा में यादवों की संख्या में कमी आई है. उनकी संख्या पिछली बार की तुलना में करीब आधी रह गई है.पिछली विधानसभा में यादव जाति के विधायकों की संख्या 55 थी. यह इस बार घटकर 28 रह गई है. यादव जाति की बिहार की जनसंख्या में हिस्सेदारी सबसे अधिक है, जाति सर्वेक्षण के मुताबिक बिहार में यादव आबादी करीब 14 फीसदी है.
बता दे की पांच दलों के गठबंधन NDA ने छप्पर फाड़ सफलता हासिल की है. इस गठबंधन ने 243 सदस्यों वाली विधानसभा में 202 सीटों पर कब्जा जमाया है.
वहीं विपक्षी महागठबंधन को केवल 35 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था.एनडीए की इस जीत में सामाजिक समीकरणों का भी योगदान सबसे अधिक है. एनडीए और महागठबंधन ने सवर्ण जातियों में सबसे अधिक टिकट राजपूत जाति को दिए थे. दोनों गठबंधनों ने राजपूत समुदाय के 49 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे. इनमें से 37 को एनडीए और 12 को महागठबंधन ने टिकट दिया था.इनमें से 35 ने चुनाव में जीत दर्ज की है. इनमें से 33 एनडीए और दो महागठबंधन से जीते हैं. इस बार की विधानसभा में सबसे अधिक संख्या राजपूत विधायकों की होगी.
किस जाति के कितने विधायक चुने गए हैं
<>- *राजपूत*: 35
<>- *यादव*: 28
<>- *ब्राह्मण*: 14
<>- *कुर्मी*: 25
<>- *कुशवाहा*: 23
<>- *बनिया*: 26
<>- *भूमिहार*: 23
<>- *कायस्थ*: 3
<>- *मुस्लिम*: 10 (एआईएमआईएम के 5, राजद के 3, कांग्रेस के 2, जेडीयू का 1)
2020 में इस प्रकार थी विधायकों की संख्या
वहीं अगर 2020 में चुनी गई विधानसभा की बात करें तो उसमें 55 यादव, 10 कुर्मी, 16 कुशवाहा, 22 वैश्य, 18 राजपूत, 17 भूमिहार, 12 ब्राह्मण, तीन कायस्थ, ओबीसी की अन्य जातियों के 21 विधायक थे. वहीं 14 मुस्लिम विधानसभा के लिए चुने गए थे.








