बिजनेस न्यूज: अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह ने हाल ही में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म Viceroy Research की रिपोर्ट को “मिथ्या और भ्रामक” करार दिया है, जिसमें कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वेदांता ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल पब्लिक डाटा को तोड़-मरोड़कर पेश करती है और इसका मकसद ग्रुप को बदनाम कर बाजार में घबराहट फैलाना है।
कंपनी की सफाई के मुख्य बिंदु:👇
– रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल
वेदांता ने कहा कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप बेबुनियाद और चयनात्मक जानकारी पर आधारित हैं।
– संपर्क नहीं किया गया
कंपनी का दावा है कि Viceroy ने रिपोर्ट जारी करने से पहले कोई स्पष्टीकरण या फीडबैक के लिए वेदांता से संपर्क नहीं किया।
– रिपोर्ट की टाइमिंग संदिग्ध
वेदांता का इशारा है कि यह रिपोर्ट जानबूझकर डिमर्जर से ठीक पहले लाई गई है ताकि आने वाले कॉर्पोरेट इनिशिएटिव को कमजोर किया जा सके।
– सिर्फ राय, कोई तथ्य नहीं
– वेदांता ने रिपोर्ट के पेज 7 की तरफ ध्यान दिलाया, जहां लिखा है कि यह रिपोर्ट सिर्फ “शैक्षिक उद्देश्यों” के लिए हैं और इसमें लिखी बाते राय हैं, तथ्य नहीं।
– शेयरधारकों की समझ
कंपनी ने कहा कि उनके निवेशक और अन्य हितधारक इतने समझदार हैं कि इस तरह की “शॉर्ट-टर्म प्रोपेगेंडा” को पहचान सकें।
– बिजनेस और ग्रोथ पर फोकस:
वेदांता का कहना है कि कंपनी अपनी विकास योजनाओं पर काम कर रही है और ऐसे आरोपों से भटकने वाली नहीं है ।
– अफवाहों से दूर रहे
– वेदांता ने सभी से अपील की है कि बिना पुष्टि वाली रिपोर्ट या अफवाहों पर भरोसा न करे।
आगे क्या होगा?
अब नियामक एजेंसियों (SEBI, MCA) और बाजार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि आगे क्या होगा। निवेशकों के लिए ज़रूरी है कि वो जल्दबाजी में फैसला न लें और आधिकारिक अपडेट्स का इंतज़ार करें। वेदांता के शेयरों में 7.4% और Hindustan Zinc में 2.8% तक की गिरावट आई है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है ।
बता दें कि वायसराय रिसर्च को वायरकार्ड (Wirecard) और स्टाइनहॉफ (Steinhoff) जैसी कंपनियों में धोखाधड़ी उजागर करने के लिए जाना जाता है।








