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कोरबा भाजपा में मची रार: सार्वजनिक मंच पर दिखी गुटबाजी, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की ‘अनदेखी’ से गरमाई सियासत

कोरबा, छत्तीसगढ़ 12 जनवरी । औद्योगिक नगरी कोरबा में आयोजित वनवासी कल्याण आश्रम के स्थापना दिवस और गौरा पूजा महोत्सव के दौरान भाजपा की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और शिष्टाचार को ताक पर रखकर वरिष्ठ आदिवासी नेता व पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को मंच की दूसरी पंक्ति में धकेल दिया गया। यह वाकया अब जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

PSO ने निभाया फर्ज, जिम्मेदार नेता रहे मौन

रविवार को जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंच पर पहुंचे, तो उनके साथ उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, महापौर संजूदेवी राजपूत और जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी जैसे नेता पहली पंक्ति में नजर आए। वहीं, पार्टी के सबसे वरिष्ठ आदिवासी चेहरों में शुमार ननकीराम कंवर को पीछे की पंक्ति में बैठना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि मंच पर मौजूद अन्य जिम्मेदार नेताओं ने उन्हें दूसरी पंक्ति में देखकर भी नजरअंदाज कर दिया।

अंततः मुख्यमंत्री के PSO (सुरक्षा अधिकारी) ने संवेदनशीलता दिखाते हुए ननकीराम कंवर के पास जाकर उनसे आगे की पंक्ति में बैठने का आग्रह किया, जिसके बाद वे सामने आए। एक सुरक्षाकर्मी द्वारा शिष्टाचार निभाए जाने और स्थानीय नेताओं की चुप्पी ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान पर मुहर लगा दी है।

क्या यह जानबूझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर बैठने की व्यवस्था केवल एक संयोग नहीं, बल्कि एक गहरा संकेत होती है। ननकीराम कंवर जैसे कद्दावर नेता, जिन्होंने आदिवासी अंचलों में भाजपा की जड़ें मजबूत कीं, उनकी इस तरह की अनदेखी को कार्यकर्ता ‘सुनियोजित रणनीति’ के तौर पर देख रहे हैं। चर्चा है कि जिले में एक धड़ा पुराने और वरिष्ठ नेताओं के कद को छोटा करने की कोशिश में जुटा है।

आदिवासी वोट बैंक पर पड़ सकता है असर

गौरा पूजा जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में आदिवासी समाज के बड़े नेता के साथ हुए इस व्यवहार से समर्थकों में भारी नाराजगी है। जानकारों की मानें तो:

  • यह घटनाक्रम भाजपा की ‘अंतर्कलह’ को जनता के बीच ले आया है।

  • आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा की रणनीति के लिहाज से यह नकारात्मक संकेत है।

  • अनुभवी नेताओं की उपेक्षा से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, गौरा पूजा महोत्सव के मंच ने यह साफ कर दिया है कि कोरबा भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं है। दूसरी पंक्ति से पहली पंक्ति तक का कंवर का यह सफर कुर्सी बदलने मात्र का नहीं था, बल्कि इसने जिले की सियासत में मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है।

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