बिलासपुर, 7 नवंबर: महासमुंद फैमिली कोर्ट के न्यायिक अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में पुलिस विभाग ने सख्त कदम उठाया है। एसएसपी रजनेश सिंह ने बिलासपुर के सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। उनकी जगह अब नरेश चौहान को सरकंडा थाने की कमान सौंपी गई है। हालांकि, जारी आधिकारिक आदेश में थाना प्रभारी को हटाने की वजह प्रशासनिक कारणों को बताया गया है।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद महासमुंद फैमिली कोर्ट के जज प्रफुल्ल कुमार सोनवानी से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, एक प्रॉपर्टी डीलर की बर्थडे पार्टी के दौरान जज की पत्नी और उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इस घटना के बाद जज सोनवानी ने सरकंडा थाने में प्रॉपर्टी डीलर अभय बरुआ और उसके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
वहीं, दूसरी तरफ अभय बरुआ के एक साथी की शिकायत के आधार पर सरकंडा पुलिस ने जज प्रफुल्ल कुमार सोनवानी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर ली थी।
न्यायिक अधिकारी पर FIR से उठे सवाल
एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। यह मामला इस बात को लेकर सुर्खियों में आया कि क्या किसी जज के खिलाफ अपराध दर्ज करने से पहले आवश्यक विधिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक अनुमति का पालन किया गया था या नहीं।
जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से न्यायिक अधिकारियों में भी काफी नाराजगी देखने को मिली। यह मामला तेजी से पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग के भीतर आंतरिक चर्चा शुरू हो गई।
एसएसपी के लौटने के बाद हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, एसएसपी रजनेश सिंह के छुट्टी पर होने के कारण इस मामले में तुरंत कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया जा सका था। जैसे ही एसएसपी वापस लौटे, उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी प्रदीप आर्य को लाइन अटैच कर दिया। उनकी जगह नरेश चौहान को नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। हालांकि, पुलिस विभाग की तरफ से एफआईआर दर्ज करने में हुई कथित प्रक्रियात्मक चूक पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।




