श्रीनगर / बारामूला 25अक्टूबर 2026 Jammu Kashmir Politics : नेशनल कान्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला के एक हालिया बयान ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हलकों में नया विवाद पैदा कर दिया है। बारामूला के डाक बंगले में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान द्वारा कश्मीरी मुद्दे को उठाए जाने के कारण ही आज कश्मीरियों की जान सुरक्षित है।

उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत सरकार केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर ‘खामोश’ है। अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान भी किया।
‘गांधी-नेहरू के भारत से जुड़े हैं, फिर देशभक्ति पर सवाल क्यों?’
विवादित दावों के बीच फारूक अब्दुल्ला ने अपनी देशभक्ति का बचाव करते हुए कहा, “हमने कभी यह नहीं कहा कि हम हिंदुस्तानी नहीं हैं। हम गांधी और नेहरू के भारत से जुड़े हुए हैं।” उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करना देशविरोधी होना नहीं है। उन्होंने बिजली संकट और जलविद्युत परियोजनाओं के अधिकार जैसे स्थानीय मुद्दों को भी उठाया।
भाजपा का तीखा हमला: उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस से मांगा जवाब
भाजपा प्रवक्ता और विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को अनुचित और राष्ट्रविरोधी करार दिया। पठानिया ने कहा:
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जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा और मजबूती भारतीय संविधान, सुरक्षा बलों के सर्वोच्च बलिदान और स्थानीय लोगों के अदम्य साहस का परिणाम है, न कि पाकिस्तान की वजह से।
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1947 के कबायली हमले से लेकर आज तक पाकिस्तान केवल आतंकवाद और अशांति को बढ़ावा देता आया है।
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भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस (INDI गठबंधन) से सवाल किया कि क्या वे फारूक अब्दुल्ला के इस बयान का समर्थन करते हैं। साथ ही, कानून के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ऐतिहासिक संदर्भ और सामाजिक विरोध
समाजसेवी सलीम रेशी ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताया। संयोगवश, फारूक अब्दुल्ला का यह बयान जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय दिवस से ठीक दो दिन पहले उसी बारामूला में आया, जहाँ 1947 में पाकिस्तानी हमलावरों को श्रीनगर की ओर बढ़ने से रोकते हुए नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकर्ता मकबूल शेरवानी ने अपना बलिदान दिया था।
रेशी ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान को रक्षक बताना क्या मकबूल शेरवानी के बलिदान का अपमान नहीं है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या फारूक अब्दुल्ला अपने पिता शेख अब्दुल्ला द्वारा विलय प्रक्रिया में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भी नकार रहे हैं?
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