सक्ती (छत्तीसगढ़) 9 जुलाई । छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट (पूर्व में एथेना पावर प्लांट) के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के प्रभावितों (भू-विस्थापितों) ने पुनर्वास लाभ न मिलने पर बड़ा कानूनी रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के पुराने आदेश का पालन न होने से नाराज प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) याचिका दायर की है। इस याचिका में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत चार प्रमुख पक्षों को प्रतिवादी (पक्षकार) बनाया गया है।
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इन बड़े चेहरों को बनाया गया पक्षकार
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए निम्नलिखित अधिकारियों व पदाधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाया है:
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अनिल अग्रवाल (चेयरमैन, वेदांता समूह)
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शम्मी आबिदी (सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग)
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अमृत विकास तोपनो (कलेक्टर, सक्ती)
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डभरा एसडीएम (अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व)
क्या है पूरा मामला? (2008 से अब तक)
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जमीन अधिग्रहण (2008): सक्ती जिले के सिंघीतराई में पावर प्लांट की स्थापना के लिए साल 2008 में लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे।
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उम्मीदें और नीतियां: पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत इन प्रभावित परिवारों को या तो स्थायी नौकरी मिलनी थी या फिर नियमानुसार मासिक भत्ता दिया जाना था।
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वेदांता का टेकओवर (2022): साल 2013 में शुरू हुआ यह प्लांट 2016 में वित्तीय संकट के कारण बंद हो गया था। इसके बाद साल 2022 में वेदांता समूह ने इसका अधिग्रहण किया और साल 2025 में यहाँ दोबारा उत्पादन शुरू हुआ। इसके बावजूद 400 से अधिक प्रभावित परिवार आज भी रोजगार और भत्ते की राह देख रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
प्रभावितों के अनुसार, साल 2021 में 37 परिवारों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के कड़े निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने एक विशेष समिति का गठन किया और प्लांट प्रबंधन को पात्र परिवारों को भत्ता देने के आदेश जारी किए। इसके बाद कलेक्टर ने भी आधिकारिक आदेश जारी किया, लेकिन धरातल पर अब तक किसी को भी इसका लाभ नहीं मिला।
कलेक्टर का पक्ष: सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने अपनी ओर से प्लांट प्रबंधन को नियमानुसार भुगतान के निर्देश जारी कर दिए हैं। मामले को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल, इस अवमानना याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई होना बाकी है, जहाँ सभी प्रतिवादियों को अदालत के समक्ष अपना जवाब पेश करना होगा।




