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ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका: अमेरिकी सीनेट ने पास किया प्रस्ताव, ईरान पर सैन्य कार्रवाई से पहले लेनी होगी कांग्रेस की मंजूरी

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मुख्य बिंदु 
  • बड़ी पाबंदी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बिना कांग्रेस (संसद) की मंजूरी के ईरान पर एकतरफा हमला या सैन्य कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।

  • पार्टी के भीतर बगावत: ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के 4 बागी सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया।

  • कड़ा मुकाबला: अमेरिकी सीनेट में यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव 50-48 के करीबी अंतर से पास हुआ।

  • समय: यह फैसला ऐसे समय आया है जब जेनेवा में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता और युद्धविराम की कोशिशें जारी हैं।

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पूरा मामला: घरेलू मोर्चे पर घिरे राष्ट्रपति ट्रंप

नई दिल्ली, 24 जून। ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपने ही देश में भारी राजनीतिक और कानूनी दबाव में घिर गए हैं। अमेरिकी सीनेट ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक प्रस्ताव पास कर ट्रंप प्रशासन की बेलगाम सैन्य शक्तियों पर लगाम लगा दी है।

इस प्रस्ताव के तहत साफ कर दिया गया है कि अगर अमेरिका पर कोई तात्कालिक या सीधा खतरा नहीं है, तो राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ किसी भी नई सैन्य कार्रवाई की शुरुआत नहीं कर सकते। इसके लिए उन्हें पहले अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक अनुमति लेनी होगी।

सीनेट में 50-48 से पास हुआ प्रस्ताव, अपनों ने ही दिया दगा

सीनेट में इस प्रस्ताव पर बेहद करीबी और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विरोध में 48 वोट पड़े। ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ा झटका यह रहा कि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों—रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोवस्की और बिल कैसिडी—ने पाला बदलकर विपक्ष (डेमोंक्रेट्स) का साथ दिया। वहीं, डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ट्रंप के समर्थन में वोट किया।

क्या है ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ और क्या होगा इसका असर?

यह पूरा कदम 1973 के वॉर पावर्स रेजोल्यूशन (War Powers Resolution) के तहत उठाया गया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य ही राष्ट्रपति की एकतरफा युद्ध घोषित करने की शक्तियों को सीमित करना है। अमेरिकी इतिहास में यह पहला मौका है जब कांग्रेस ने इस तरह एकजुट होकर राष्ट्रपति की सैन्य ताकतों को बांधने की कोशिश की है।

कानूनी पेंच और अदालती लड़ाई के आसार: हालांकि प्रस्ताव सीनेट से पास हो चुका है, लेकिन इसके तत्काल लागू होने पर कानूनी बहस छिड़ गई है। वॉर पावर्स एक्ट के तहत आने वाले ऐसे प्रस्ताव राष्ट्रपति के दस्तखत के लिए व्हाइट हाउस नहीं भेजे जाते, इसलिए ये सीधे तौर पर पूर्ण कानून का रूप नहीं लेते। ट्रंप प्रशासन ने इसे पहले ही ‘असंवैधानिक’ करार दे दिया है, जिससे साफ है कि यह मामला आने वाले दिनों में अदालत की दहलीज तक पहुँच सकता है।

शांति वार्ता के बीच कूटनीति को प्राथमिकता का संदेश

सीनेट का यह कड़ा फैसला एक बेहद नाजुक मोड़ पर आया है। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए स्विट्जरलैंड के जेनेवा में अहम बैठकें हो रही हैं और दोनों पक्ष युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देश युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति के पक्ष में है।

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