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शांति वार्ता में बढ़ा गतिरोध: ट्रंप की ‘घर न लौट पाने’ की धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बीच में ही छोड़ी बैठक

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बर्जेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड) 22 जून : पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड के बर्जेनस्टॉक रिजार्ट में शुरू हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पहले ही दिन बड़े संकट में घिर गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेहद सख्त और आक्रामक टिप्पणी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बीच में ही वार्ता छोड़ दी है, जिससे इस ऐतिहासिक शांति प्रक्रिया पर फिलहाल पूर्ण विराम लगता नजर आ रहा है।

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ट्रंप की धमकी और ईरान का कड़ा रुख

वार्ता के समानांतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान बेहद कड़े तेवर दिखाए। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों को सीधी चेतावनी दी है कि यदि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से बंद किया गया, तो वे “अपने देश वापस नहीं लौट पाएंगे।” ट्रंप ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इस समुद्री मार्ग का सीधा ऑपरेशनल कंट्रोल अपने हाथ में ले सकता है और वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है।

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इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी वार्ता टीम के एक वरिष्ठ सदस्य ने सरकारी मीडिया से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह रवैया बदतमीजी और धमकी भरा है। ईरान ने साफ कर दिया कि जब तक लेबनान पर इजरायली हमले और युद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं होते, तब तक किसी भी मुद्दे पर बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इस गतिरोध के बाद ईरानी दल बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गया।

कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता को लगा झटका

यह शांति वार्ता कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में आयोजित की जा रही थी। बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर कतर के प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री अब्दुलरहमान अल थानी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद मौजूद थे।

पिछले बुधवार को दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले प्रारंभिक समझौते (MoU) पर सहमति बनी थी, जिसके बाद अगले 60 दिनों तक तकनीकी पहलुओं पर बात होनी थी। लेकिन इस नए विवाद ने कतर द्वारा तैयार किए गए शांति वार्ता के रोडमैप को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ठप पड़ा एयर ट्रैफिक

इस हाई-प्रोफाइल वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। बर्जेनस्टॉक रिजार्ट के 50 किलोमीटर के दायरे को हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील कर आसमान से सैन्य हेलीकॉप्टरों द्वारा निगरानी रखी जा रही थी। सुरक्षा के लिए लगाए गए सिग्नल्स और जैमिंग के कारण ज्यूरिख एयरपोर्ट का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम भी कुछ देर के लिए ठप हो गया था, जिसे बाद में दुरुस्त किया गया।

वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका

वार्ता टूटने और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने की खबरों के बीच रविवार को ही इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही ठप हो गई। इसके असर से खाड़ी देशों के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों पर इसका बेहद बुरा असर दिखेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर आसमान छू सकती हैं।

उधर, इजरायल ने लेबनान पर अपनी बमबारी और तेज कर दी है, जिससे हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मध्यस्थ देश एक बार फिर दोनों महाशक्तियों को मेज पर वापस लाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।

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