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छत्तीसगढ़ का सियासी पारा हाई: एक ही कार में सवार दिखे राहुल गांधी,सचिन पायलट और भूपेश बघेल; स्वागत में भारी धक्का-मुक्की

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रायपुर, 21 जून:

छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज उस वक्त सियासी हलचल अचानक तेज हो गई जब कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी रायपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर उतरते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका आतिशबाज़ी और गगनभेदी नारों के साथ ज़ोरदार स्वागत किया। लेकिन इस दौरे की सबसे ज्यादा चर्चा उस एक ‘गाड़ी’ को लेकर हो रही है, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारों में कयासों का बाज़ार गर्म कर दिया है।

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एक ही कार में तीन दिग्गज: एकजुटता का बड़ा संदेश

रायपुर एयरपोर्ट से सीधे अभनपुर के लिए रवाना होते समय राहुल गांधी के साथ कार में कांग्रेस के दो कद्दावर नेता—सचिन पायलट और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद थे।

सियासी मायने: तीनों नेताओं का एक ही गाड़ी में बैठकर अभनपुर पहुंचना महज़ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि कांग्रेस आलाकमान द्वारा राज्य में गुटबाजी को खत्म करने और ‘ऑल इज़ वेल’ का संदेश देने की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। आगामी चुनावों और सांगठनिक फेरबदल के लिहाज से इस एकजुटता के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

स्वागत के उत्साह में हंगामा: गेट पर फंसे नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत

राहुल गांधी के अभनपुर आगमन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह इस कदर चरम पर था कि वह अव्यवस्था में बदल गया। स्वागत करने की होड़ में कार्यकर्ताओं के बीच भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

  • सुरक्षाकर्मियों को बंद करना पड़ा गेट: स्थिति को बेकाबू होते देख और राहुल गांधी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में मुख्य गेट को बंद कर दिया।

  • गेट के बाहर फंसे वीआईपी: इस अफरा-तफरी के बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत काफी देर तक गेट के बाहर ही फंसे रह गए।

  • देर से हुई एंट्री: जब अंदर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को भनक लगी कि नेता प्रतिपक्ष बाहर ही छूट गए हैं, तब जाकर तुरंत गेट खोला गया और उन्हें अंदर लाया गया।

अभनपुर दौरा क्यों है खास?

राहुल गांधी का यह दौरा छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नई ऊर्जा फूंकने के तौर पर देखा जा रहा है। भूपेश बघेल और सचिन पायलट की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि केंद्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ को लेकर बेहद गंभीर है। कार्यकर्ताओं के भारी हुजूम और धक्का-मुक्की ने यह तो साबित कर दिया कि ज़मीन पर जोश हाई है, लेकिन बड़े नेताओं का इस तरह बाहर फंसना संगठन की मैनेजमेंट पर कुछ सवाल भी खड़े कर गया है।

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