नई दिल्ली 5 जून : देश की राजधानी में सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक ताजा और बेहद आक्रामक बयान ने केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी के इस तीखे दावे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिससे पूरे देश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
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आदिवासी नेताओं के बीच से केंद्र पर सीधा निशाना
यह पूरा मामला दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय, इंदिरा भवन का है। यहाँ आयोजित ‘राष्ट्रीय आदिवासी प्रोफेशनल कॉन्क्लेव’ में देशभर से आए जनजातीय समाज के बुद्धिजीवियों, प्रोफेशनल्स और नेताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला।
मंच से हुंकार भरते हुए राहुल गांधी ने एनडीए सरकार की स्थिरता पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
“केंद्र की मौजूदा एनडीए सरकार बुनियादी तौर पर कमजोर हो चुकी है। देश की राजनीतिक हवा बदल रही है और मैं आपको पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले एक साल के भीतर अपने पद पर नहीं रहेंगे।”
राहुल गांधी ने केवल सरकार की उम्र पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को कुचलकर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने जनजातीय नेताओं से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।
बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया: “यह देश में डर और अस्थिरता फैलाने का खेल”
राहुल गांधी के इस बयान के चंद मिनटों के भीतर ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया।
बीजेपी की ओर से मुख्य रूप से ये बातें कही गईं:
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देश को अस्थिर करने की कोशिश: बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जानबूझकर देश के भीतर डर, भ्रम और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल पैदा करना चाहते हैं, ताकि देश की प्रगति को रोका जा सके।
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जनादेश पर हमला: पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि देश की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए एनडीए को सरकार चलाने का स्पष्ट जनादेश दिया है। राहुल गांधी का यह बयान जनता के फैसले का अपमान है।
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हार की हताशा: सत्तापक्ष ने इसे राहुल गांधी की ‘राजनीतिक हताशा’ बताते हुए कहा कि विपक्ष के पास सरकार की नीतियों का मुकाबला करने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे इस तरह की सनसनीखेज और मनगढ़ंत बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं।
संसद से सड़क तक संग्राम के आसार
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इंदिरा भवन से उठी यह चिंगारी आने वाले दिनों में एक बड़े सियासी संग्राम का रूप ले सकती है। राहुल गांधी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि विपक्ष अब रक्षात्मक होने के मूड में बिल्कुल नहीं है और वह सरकार की घेराबंदी और तेज करेगा। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी इस बयान को मुद्दा बनाकर विपक्ष को ‘अस्थिरतावादी’ साबित करने की पूरी कोशिश करेगी। फिलहाल, इस तीखी बयानबाजी ने देश के सियासी गलियारे में हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है।







