कोलकाता/ नई दिल्ली 4 मई 2026 : राजनीति में कभी-कभी ‘हवा’ नहीं, ‘स्वाद’ चलता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने यह साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का झाड़ग्राम के चौराहे पर झालमुड़ी चबाना कोई मामूली नाश्ता नहीं था, बल्कि वह टीएमसी के वोट बैंक को चबाने की एक सोची-समझी ‘क्रंची’ रणनीति थी।
दाना-दाना गुल्लक में, वोट गिरे बीजेपी के पक्ष में
झाड़ग्राम बेल्ट की चार सीटों— झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम—के रुझान किसी ‘स्पाइसी’ फिल्म के क्लाइमेक्स जैसे लग रहे हैं। जैसे-जैसे ईवीएम से वोटों का दाना निकल रहा , विपक्ष के चेहरे का रंग उड़ता गया ।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पीएम मोदी ने वहां झालमुड़ी क्या खाई, जनता ने बीजेपी की जीत का ‘मसाला’ ही तैयार कर दिया। इन चारों सीटों पर बीजेपी की बढ़त ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता को इस बार दिल्ली वाला तड़का काफी रास आ रहा है। विपक्ष अब कोने में बैठकर वही पुराना गाना गुनगुना रहा है— “अजीब दास्तां है ये, कहाँ शुरू कहाँ खतम…”
सियासत का नया ‘मेनू कार्ड’
इन रुझानों ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब रैलियों में विकास दर की फाइलें दिखाने के बजाय, नेता अपने साथ ‘नमक-मिर्च’ का डिब्बा लेकर चलेंगे?
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बीजेपी का दावा: “हमारी झालमुड़ी में जीत का स्वाद है।”
बड़ी बात: झाड़ग्राम की चार सीटों पर बीजेपी की यह बढ़त क्या पूरे बंगाल का मूड है, या सिर्फ उस ‘झालमुड़ी’ का असर जो पीएम ने चखकर जनता का दिल जीत लिया? नतीजा जो भी हो, पर फिलहाल तो बीजेपी खेमे में ‘मुड़ी’ का जश्न है और विपक्ष के खेमे में सन्नाटे का गाना!







