कोरबा 10 अप्रैल। औद्योगिक क्षेत्र बालको नगर में प्रशासन की संवेदनहीनता और भारी वाहनों की मनमानी अब आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने इस गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो पूरा जिला जन-आंदोलन की तपिश झेलेगा।
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प्रशासन की फाइल में दफन जनता का दर्द
भाकपा के जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने अपने प्रेस बयान में तीखे शब्दों में कहा कि वर्ष 2022 से लगातार रैली, धरना-प्रदर्शन और जिलाधीश को ज्ञापन सौंपने के बावजूद शासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासन की इस चुप्पी ने यह साबित कर दिया है कि उसे जनता की सुरक्षा से ज्यादा भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही की चिंता है।

खूनी सड़कें और धूल का कहर
बजरंग चौक, परसाभाठा से लेकर रिसदी चौक तक की सड़कें हादसों का केंद्र बन चुकी हैं।
विजिबिलिटी जीरो: रात के वक्त उड़ने वाली डस्ट इतनी भयावह होती है कि सामने से आ रहा वाहन दिखाई नहीं देता।
श्रमिकों की जान खतरे में: भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) के हजारों कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर ड्यूटी आने-जाने को मजबूर हैं।
मांग: शिफ्ट चेंज (अ, ब, स पाली) के समय भारी वाहनों पर सख्ती से ‘नो एंट्री’ लागू की जाए।
विकास के दावों की खुली पोल
पवन वर्मा ने भदरापारा गायत्री मंदिर रोड, पॉलिटेक्निक कॉलेज मार्ग और परसाभाठा साप्ताहिक बाजार की जर्जर स्थिति पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं और बाजार की गुमटियों के शेड कभी भी गिर सकते हैं। इन समस्याओं ने अब तक कई लोगों की जान ले ली है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
अंतिम चेतावनी: अब ज्ञापन नहीं, चक्काजाम होगा
सीपीआई ने शासन और प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता में व्याप्त असंतोष अब ज्वालामुखी बन चुका है। यदि सड़कों का सुधार और ‘नो एंट्री’ की व्यवस्था तत्काल नहीं की गई, तो भाकपा उग्र जन-आंदोलन और चक्काजाम के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।









