नई दिल्ली: संसद के गलियारों में आज राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छेड़ दी है। इस चुनौती को ध्वस्त करने और सदन में अपनी अभेद्य एकजुटता दिखाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कमर कस ली है।
सत्ता पक्ष की घेराबंदी: ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी
BJP ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को आज, 11 मार्च के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी कर सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। पार्टी की रणनीति केवल इस प्रस्ताव को गिराना नहीं, बल्कि भारी बहुमत के साथ विपक्ष के मनोबल को तोड़ना है।
व्हिप का महत्व: यदि कोई सांसद इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे ‘दल-बदल विरोधी कानून’ के तहत अपनी सदस्यता गंवानी पड़ सकती है।
क्यों बढ़ा विवाद? विपक्ष के गंभीर आरोप
अविश्वास प्रस्ताव की नींव मंगलवार को पड़ी जब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर पर भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष का मुख्य तर्क है:
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दोहरा मापदंड: बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बार-बार रोका गया और नियमों का हवाला दिया गया।
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पक्षपात का आरोप: विपक्ष का कहना है कि जहां एक ओर उन्हें लेखों का हवाला देने से रोका गया, वहीं सत्ता पक्ष के सांसदों को सदन में विवादित सामग्री दिखाने की छूट दी गई।
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लोकतंत्र की अनदेखी: 50 सांसदों के समर्थन वाले इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष सरकार को ‘कमजोर’ और ‘तानाशाह’ साबित करने की कोशिश कर रहा है।
2026 की सियासी जंग का ट्रेलर
आज होने वाली चर्चा और संभावित मतदान महज एक संसदीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह 2026 की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच साख की लड़ाई है। एनडीए (NDA) के रणनीतिकार सहयोगी दलों के साथ मिलकर विपक्ष की हर चाल को मात देने के लिए तैयार हैं।








