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राज्यसभा चुनाव: छत्तीसगढ़ भाजपा में ‘स्थानीय’ चेहरों पर दांव, पैनल में कद्दावर नेताओं के नाम शामिल

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रायपुर 2 मार्च | छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण भाजपा के खाते में एक सीट जाना तय है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार किसी ‘बाहरी’ चेहरे के बजाय स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए पैनल में अनुभवी और क्षेत्रीय समीकरणों में फिट बैठने वाले नामों को शामिल किया गया है।

भाजपा की रणनीति: मिशन 2028 की तैयारी

भाजपा का मुख्य फोकस उन नेताओं को उच्च सदन भेजना है, जिनका राज्य की राजनीति में गहरा प्रभाव है। पार्टी इसके जरिए आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और 2028 के विधानसभा रोडमैप को मजबूती देना चाहती है।

 इन नामों पर टिकी हैं सबकी निगाहें:

पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में इन 4 प्रमुख चेहरों की चर्चा सबसे तेज है:

  1. गौरीशंकर अग्रवाल (अनुभवीनेता ) पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अग्रवाल का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।

  2. सरोज पांडे (राष्ट्रीय कद और महिला नेतृत्व): पूर्व सांसद सरोज पांडे को फिर से राज्यसभा भेजकर पार्टी महिला सशक्तिकरण और दुर्ग संभाग के राजनीतिक समीकरणों को साधना चाहती है।

  3. प्रबल प्रताप सिंह जूदेव (हिंदुत्व और आदिवासी पहचान): जशपुर राजपरिवार से आने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को मौका देकर भाजपा सरगुजा क्षेत्र और आदिवासी समाज में ‘हिंदुत्व’ के अपने एजेंडे को और प्रखर कर सकती है।

  4. नारायण चंदेल (ओबीसी और सांगठनिक अनुभव): पूर्व नेता प्रतिपक्ष के रूप में चंदेल का अनुभव और पिछड़ा वर्ग में उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

  5. नवीन मार्कंडेय / कृष्णमूर्ति बांधी: अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आने वाले ये दोनों नेता पार्टी के पुराने वफादार हैं। यदि पार्टी SC कार्ड खेलती है, तो इनमें से किसी एक को मौका मिल सकता है।

 संख्या बल और चयन की प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं। राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है, जिसे भाजपा आसानी से हासिल कर लेगी। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के बाद से ही नामांकन प्रक्रिया जारी है, जो 5 मार्च तक चलेगी।


राजनीतिक विश्लेषण: “भाजपा इस बार किसी भी तरह के जोखिम से बचकर अपने कैडर को यह संदेश देना चाहती है कि संघर्ष करने वाले स्थानीय नेताओं का सम्मान सर्वोपरि है। पैनल में शामिल नाम यह दर्शाते हैं कि दिल्ली दरबार छत्तीसगढ़ के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर ही अंतिम मुहर लगाएगा।”

दूसरी ओर  राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा किसी ‘सरप्राइज नेम’ (जैसे किसी रिटायर्ड अधिकारी या ज़मीनी कार्यकर्ता) को लाकर सबको चौंका सकती है, जैसा कि उसने मुख्यमंत्री चयन के समय किया था।

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