Latest News
नाथद्वारा: श्रीनाथजी मंदिर में “श्री लाल गोविंद मंडान” का शुभारंभ, मर्जादी वैष्णवों के लिए निःशुल्क महाप्रसाद की व्यवस्था शुरू आत्मसम्मान से समझौता नहीं! सिंगर दलेर मेहंदी विवाद पर बोले मंत्री सुबोध उनियाल- ‘इस्तीफा दे दूंगा, पर माफी नहीं मांगूंगा’ आंध्र प्रदेश के तट से टकराया भीषण चक्रवात ‘मुरासु’, 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हवाएं; ओडिशा-पुडुचेरी में अलर्ट धीरेंद्र शास्त्री की राम-कृष्ण टिप्पणी पर गर्माई राजनीति: दिग्विजय बोले ‘मूर्ख’, बघेल का कटाक्ष- ‘रेबीज की जांच हो’ रायपुर: श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल ने पार किया 45 हजार बाल शल्य चिकित्सा का ऐतिहासिक आंकड़ा, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जताई खुशी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रायपुर दौरा आज: ‘विकसित भारत संकल्प पार्क’ का करेंगे उद्घाटन,दौरे का पूरा मिनट-टू-मिनट शेड्यूल
Home » छत्तीसगढ़ » बस्तर में नक्सलवाद को तगड़ा झटका: दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सचिव मोहन कड़ती की पत्नी भी शामिल

बस्तर में नक्सलवाद को तगड़ा झटका: दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सचिव मोहन कड़ती की पत्नी भी शामिल

Share:

Naxal Surrender दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ | 09 जनवरी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और प्रशासन को बड़ी सफलता हाथ लगी है। राज्य सरकार के ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइए) अभियान से प्रभावित होकर कुल 63 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं।

संगठन की कमर टूटी: सचिव ने भी डाले हथियार!

सूत्रों के मुताबिक, इस आत्मसमर्पण में सबसे चौंकाने वाला नाम पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती का है। बताया जा रहा है कि मोहन कड़ती ने अपनी पत्नी के साथ पुलिस के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। यदि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि होती है, तो यह नक्सली संगठन के लिए इस दशक का सबसे बड़ा झटका साबित होगा। लंबे समय से सक्रिय रहे कड़ती का सरेंडर होना बस्तर में नक्सली नेटवर्क के ध्वस्त होने का संकेत है।

लोन वर्राटू अभियान का बढ़ता प्रभाव

दंतेवाड़ा पुलिस कार्यालय में दोपहर 2 बजे आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि की विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों के अनुसार:

  • सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सघन सर्चिंग ने नक्सलियों को अलग-थलग कर दिया है।

  • ग्रामीण इलाकों में पहुंच रही विकास योजनाओं और सरकार की उदार पुनर्वास नीति से नक्सली प्रभावित हो रहे हैं।

  • आत्मसमर्पण करने वाले सभी पूर्व कैडरों को सरकार की नीति के तहत तात्कालिक सहायता और पुनर्वास लाभ दिए जाएंगे।

यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कैडरों के हटने से नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।