Chhattisgarh Politics। छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में एक बार फिर ‘दिल्ली की दहलीज’ तक पहुंचने की होड़ शुरू हो गई है। अगले साल 9 अप्रैल 2026 को सूबे की दो राज्यसभा सीटें खाली होने जा रही हैं। वर्तमान में इन सीटों पर कांग्रेस की फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी का कब्जा है। प्रदेश में बदली हुई सत्ता की समीकरणों के बीच इस बार एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की प्रबल संभावना है, जिसने दोनों खेमों में हलचल तेज कर दी है।
बस्तर-सरगुजा के आदिवासी दिग्गजों की नजर
प्रदेश की कुल 5 राज्यसभा सीटों में से 2 रिक्त हो रही हैं। चर्चा है कि भाजपा इस बार किसी आदिवासी चेहरे या ओबीसी (OBC) कार्ड के जरिए 2028 के आगामी विधानसभा चुनावों की बिसात बिछा सकती है। खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग के कद्दावर नेता अभी से सक्रिय हो गए हैं। भाजपा के भीतर इस बात को लेकर मंथन जारी है कि क्या किसी स्थानीय संगठन के व्यक्ति को मौका दिया जाए या फिर किसी बड़े चेहरों पर दांव खेला जाए।
कांग्रेस के लिए ‘स्थानीय’ मुद्दा बना चुनौती
कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख का सवाल है। पिछली बार कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ कोटे की तीन सीटों पर अन्य राज्यों के नेताओं को भेजकर ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ के विवाद को हवा दे दी थी। इस बार पार्टी के भीतर से ही यह मांग उठ रही है कि किसी छत्तीसगढ़िया नेता को ही उच्च सदन भेजा जाए। फूलो देवी नेताम का कार्यकाल खत्म होने के बाद बस्तर से किसी नए प्रतिनिधित्व को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
2028 तक करना होगा लंबा इंतजार
दावेदारों के लिए यह ‘करो या मरो’ वाली स्थिति है। यदि इस बार मौका हाथ से निकला, तो अगला अवसर जून 2028 में आएगा। तब कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन और राजीव शुक्ला का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता और दिग्गज नेता अभी से अपनी फील्डिंग सजाने में जुट गए हैं।
सियासी समीकरण एक नजर में:
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रिक्त होने वाली सीटें: 02 (9 अप्रैल 2026)
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वर्तमान सांसद: केटीएस तुलसी (कांग्रेस), फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)
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संभावित बंटवारा: 1 भाजपा, 1 कांग्रेस (विधानसभा संख्या बल के आधार पर)
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अगली बारी: 29 जून 2028 (रंजीत रंजन और राजीव शुक्ला की सीटें)








