नई दिल्ली 06/11/2026 Indian Firework Industry: भारत में दिवाली का त्योहार आते ही शिवकाशी के बारूद की गूंज और रोशनी से पूरा देश जगमगा उठता है। देश का पटाखा उद्योग लगभग ₹7,000 करोड़ का है, जिसमें अकेले तमिलनाडु का शिवकाशी शहर 85 से 90 प्रतिशत उत्पादन संभालता है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मौजूदगी न के बराबर है। विश्व पटाखा निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.042% से भी कम है, जबकि दूसरी ओर चीन हर साल 1 अरब डॉलर से अधिक के पटाखे निर्यात कर वैश्विक बाजार पर एकछत्र राज कर रहा है।

घरेलू मांग में उलझा भारतीय उद्योग, चीन ने बनाई बढ़त
भारतीय पटाखा उद्योग का 99% से अधिक उत्पादन घरेलू बाजार में ही खप जाता है। दिवाली के महज 30 दिनों के भीतर ही यह उद्योग अपनी कुल कमाई का 80% (₹4,000 करोड़ से अधिक) हासिल कर लेता है। शिवकाशी के निर्माताओं के अनुसार, घरेलू स्तर पर अत्यधिक मांग होने और निर्यात के लिए विशेष सरकारी प्रोत्साहन न मिलने के कारण वे वैश्विक बाजार का रुख नहीं कर पाते। इसके विपरीत, चीन को वहां की सरकार का मजबूत समर्थन, कम उत्पादन लागत और विशाल औद्योगिक क्लस्टर्स का सीधा फायदा मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में राह की बड़ी चुनौतियां
भारतीय पटाखों के निर्यात में पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह सख्त तकनीकी और कानूनी अड़चनें हैं:
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खतरनाक कार्गो की श्रेणी: पटाखों को ‘खतरनाक कार्गो’ माना जाता है, जिससे इनकी पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन के नियम बेहद कड़े हो जाते हैं।
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लाल श्रेणी और पोर्ट क्लीयरेंस: पटाखों को ‘रेड कैटेगरी’ में रखा गया है, जिसके चलते देश के बंदरगाहों (Ports) से क्लीयरेंस मिलना बेहद जटिल प्रक्रिया बन जाता है।
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कच्चे माल और फॉर्मूलेशन पर पाबंदी: सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेरियम नाइट्रेट पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण भारतीय निर्माता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ‘फॉर्मूलेशन’ तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर पोटेशियम परक्लोरेट का इस्तेमाल आम है।
वैश्विक बाजार में कैसे बने भारत की पहचान? विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि भारत को चीन का मजबूत विकल्प बनना है तो नीतिगत और तकनीकी स्तर पर कई ठोस कदम उठाने होंगे:
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समन्वित निर्यात विकास कार्यक्रम: फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक डॉ. अजय सहाय का सुझाव है कि शिवकाशी में साझा टेस्टिंग लैब्स, अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन और modern पैकेजिंग तकनीक की तुरंत व्यवस्था की जानी चाहिए।
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कैटेगरी में ढील: प्रोफेसर डॉ. बिस्वजीत नाग के अनुसार, पोर्ट क्लीयरेंस को आसान बनाने के लिए पटाखों को ‘रेड’ से ‘व्हाइट’ कैटेगरी में शिफ्ट करना जरूरी है।
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छोटे ऑर्डर्स से शुरुआत: वैश्विक वितरकों का भरोसा जीतने के लिए भारत को शुरुआत में छोटे और सुरक्षित ऑर्डर्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यदि सही नीतिगत समर्थन, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को अपनाया जाए, तो शिवकाशी केवल देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की दिवाली को रोशन करने का दम रखता है।




