बस्तर 05/11/2026 : दीपावली और त्योहारी सीजन के नजदीक आते ही बाजारों में इको-फ्रेंडली और पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस बार बस्तर जिले के परचनपाल गांव की प्रख्यात हस्तशिल्प कलाकार श्रीमती शोभा बघेल द्वारा सीसल (Sisal) के प्राकृतिक रेशों से तैयार किए गए कलात्मक बैग और सजावटी उत्पाद लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।

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संघर्ष से सफलता का सफर: वर्ष 2004 में हस्तशिल्प विकास बोर्ड से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, शोभा बघेल ने सीसल के मजबूत रेशों से बैग, दीवार सज्जा, टेबल मैट और उपहार योग्य करीब 40-50 प्रकार की आकर्षक कलाकृतियां बनाना शुरू किया। आज चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर उनके उत्पादों की भारी मांग है, जिससे उन्हें प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है।
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हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर: शोभा बघेल ने अपने हुनर को सिर्फ अपने तक सीमित न रखकर ग्रामीण अंचल की एक हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और उन्हें स्वरोजगार से जोड़कर महिला सशक्तिकरण की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
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‘वोकल फॉर लोकल’ की अपील: शिल्पकार शोभा बघेल ने नागरिकों से अपील की है कि त्योहारी सीजन में आम सामानों की बजाय स्थानीय कारीगरों के हस्तशिल्प को अपनाएं। इससे पारंपरिक कला को सम्मान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के जीवन में भी आर्थिक समृद्धि आएगी।




