लखनऊ 04/11/2026:बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान कृष्ण को लेकर दिए गए एक बयान पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बेहद आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है, वहीं अखिलेश यादव इसे माफ करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने शास्त्री के बहिष्कार की मांग तक उठा दी है।
आमतौर पर चुनाव नजदीक होने पर राजनेता धार्मिक विवादों से दूरी बनाते हैं, ऐसे में अखिलेश यादव का इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की परतें और इसके पीछे की राजनीतिक गणित।
क्या था धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान?
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में चल रही कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए एक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “हमारे वाले भगवान राम खड़े भी होते हैं तो एकदम सीधे, उनका धाम भी सीधा है- अयोध्या धाम। तुम्हारे वाले भगवान कृष्ण का नाम भी टेढ़ा है, वह चलते भी टेढ़े हैं और खड़े भी टेढ़े ही होते हैं। बंसी बजाना तो खेल भी है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं हैं।”
इस टिप्पणी के सामने आते ही विरोध के स्वर उठने लगे, जिसे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया गया है।
अखिलेश यादव के आक्रामक होने के पीछे की 3 मुख्य सियासी वजहें
उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 तक विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसे में इस विवाद को एक बड़े ‘सियासी हथियार’ के रूप में देखा जा रहा है:
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कोर यादव वोट बैंक को एकजुट करना: उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय की आबादी लगभग 8 से 9 प्रतिशत है। यदुवंशी भगवान कृष्ण को अपना आराध्य और पूर्वज मानते हैं। अखिलेश यादव ने अपने लगातार ट्वीट्स में इस बात पर जोर दिया है कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ने यदुवंशियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इसके जरिए सपा प्रमुख यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके समाज के आराध्य के सम्मान की रक्षा के लिए केवल समाजवादी पार्टी ही सबसे आगे खड़ी है।
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सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति को धार देना: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अक्सर सपा को ‘सनातन विरोधी’ साबित करने की कोशिश करती रही है। धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर आक्रामक तेवर अपनाकर अखिलेश यादव यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा का समर्थन करने वाले संत समाज के भीतर ही भगवान राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा कर रहे हैं, जो सनातन संस्कृति के अनुकूल नहीं है।
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पीडीए (PDA) फॉर्मूले और ओबीसी-दलित वोटों पर नजर: अखिलेश यादव ने यह सवाल भी उठाया है कि खुद को सनातन का सबसे बड़ा रक्षक बताने वाली भाजपा इस मामले पर पूरी तरह चुप क्यों है? इसके जरिए सपा अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को और मजबूत करने की जुगत में है, ताकि धार्मिक मतदाताओं के एक वर्ग को यह सोचने पर मजबूर किया जा सके कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजीव रंजन गिरी का मानना है कि इस तरह की तुलनात्मक टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द के लिहाज से उचित नहीं हैं। भगवान कृष्ण और राम के स्वरूप पर इस तरह की बयानबाजी से बहुसंख्यक समाज के भीतर ही वैचारिक मतभेद उभरते हैं, जिसका राजनीतिक दल अपने-अपने नफे-नुकसान के हिसाब से आकलन करते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ सपा का कानूनी शिकंजा
राजनीतिक बयानों के अलावा समाजवादी पार्टी इस मामले को कानूनी मोर्चे पर भी पूरी आक्रामकता से लड़ रही है। पिछले 24 घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सपा नेताओं ने एफआईआर और कार्रवाई की मांग तेज कर दी है:
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हमीरपुर: सपा कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ प्रदर्शन कर पुतला दहन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
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मेरठ: सपा लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष शशिकांत गौतम और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अनुज भड़ाना ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
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लखनऊ: हजरतगंज कोतवाली में मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के नेताओं ने औपचारिक रूप से शिकायत देकर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।





