दलबदलुओं की घर वापसी पर कांग्रेस का कड़ा रुख, अब ‘जिला समिति’ की मंजूरी के बिना नहीं मिलेगी एंट्री
भोपाल 23 अक्टूबर 2026 मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छोड़कर वापस कांग्रेस में लौटने की उम्मीद लगाए नेताओं के लिए राह आसान नहीं होगी। कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीजेपी में जाने के बाद पार्टी में वापसी चाहने वाले नेताओं को अब सीधे प्रवेश नहीं दिया जाएगा। ‘घर वापसी’ से पहले हर नेता को जिला स्तर पर कड़ी जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी अब शीर्ष नेतृत्व के बजाय स्थानीय संगठन की सहमति सबसे ज्यादा मायने रखेगी।

जिला समन्वय समिति करेगी अंतिम फैसला
कांग्रेस की नई रणनीति के तहत, वापसी के इच्छुक नेताओं के आवेदन सबसे पहले जिला समन्वय समिति (District Coordination Committee) के पास भेजे जाएंगे। यह समिति नेता के पुराने राजनीतिक रिकॉर्ड, कांग्रेस छोड़ने के कारणों और अब वापस आने की वजहों की गहराई से समीक्षा करेगी। यदि समिति सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करती है, तभी मामला भोपाल स्थित प्रदेश मुख्यालय भेजा जाएगा। यदि स्थानीय स्तर पर कोई आपत्ति आती है, तो वापसी का रास्ता बंद हो सकता है।
जबलपुर कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ ‘नाटी’ शर्मा के अनुसार, किसी भी नेता की वापसी से पहले यह देखा जाएगा कि उसने किन परिस्थितियों में पार्टी छोड़ी थी और अब उसके लौटने का उद्देश्य क्या है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने का संदेश
सूत्रों के मुताबिक, वापसी की राह देख रहे कई नेता फिलहाल खुलकर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस का यह कदम दलबदलुओं पर लगाम लगाने के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठन को तवज्जो देने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें जिला समन्वय समिति की आने वाली बैठकों पर टिकी हैं।



