जयपुर 19अक्टूबर 2026 Jaipur Ravan Mandi : विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर गुलाबी नगरी जयपुर का माहौल उत्सवमय हो चुका है। शहर के बड़े मैदानों से लेकर विभिन्न कॉलोनियों और हाउसिंग सोसायटियों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले दहन की भव्य तैयारियां अंतिम चरण में हैं ।आप पढ़ रहे है द खटिया खड़ी न्यूज । इस बार जयपुर की प्रसिद्ध ‘रावण मंडी’ में ग्राहकों की जबरदस्त चहल-पहल देखी जा रही है और बाजार में रौनक अपने चरम पर है।
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1 फीट से लेकर 40 फीट तक के पुतले उपलब्ध
जयपुर की रावण मंडी में इस वर्ष हर वर्ग और जरूरत के हिसाब से छोटे-बड़े पुतले तैयार किए जा रहे हैं। बच्चों के आकर्षण के लिए जहाँ 1 फीट के छोटे पुतले उपलब्ध हैं, वहीं सोसायटियों और बड़े आयोजनों के लिए 40 फीट तक के विशालकाय रावण बनाए गए हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज कारीगरों के अनुसार, अब तक लगभग 1500 से 2000 पुतले बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। कई पुतलों को ऑर्डर के अनुसार उनके गंतव्य तक रवाना कर दिया गया है, जबकि बचे हुए ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। रंग-बिरंगे गोटे, चमकदार कागजों और आकर्षक डिजाइनों से सजे ये पुतले मंडी से गुजरने वाले हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
बारिश बनी राह की बाधा, फिर भी बुलंद हैं कारीगरों के हौसले
इस बार बदलते मौसम और बीच-बीच में हुई बारिश ने कारीगरों की चिंताओं को बढ़ा दिया था। कई बने-बनाए पुतले बारिश की भेंट चढ़ गए, जबकि कइयों को प्लास्टिक और त्रिपाल से ढककर बचाना पड़ा। इस तमाम प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद स्थानीय कारीगरों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। कारीगरों ने बताया कि रावण बनाने की यह जटिल और कलात्मक प्रक्रिया दशहरे से लगभग ढाई से तीन महीने पहले ही शुरू हो जाती है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज इसके निर्माण में बांस की खपच्चियों, पुराने अखबारों, रंगीन क्राफ्ट पेपर, मैदे की लई (गोंद) और फैविकॉल जैसी सामग्रियों का बहुतायत में उपयोग किया जाता है।
रोजगार का बड़ा जरिया: 300 रुपये से लेकर 35 हजार तक की कीमतें
यह मौसमी व्यवसाय जयपुर के सैकड़ों परिवारों के लिए आजीविका का एक मुख्य आधार है। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार होने वाले इन पुतलों की कीमतें इनके आकार और सजावट के आधार पर तय की गई हैं:
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छोटा पुतला (1 फीट): शुरुआती कीमत लगभग ₹300 से।
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बड़ा पुतला (40 फीट तक): ₹30,000 से ₹35,000 तक की कीमत।
विशेष बात: रावण मंडी के कारीगर केवल पुतलों का ढांचा और बाहरी सजावट तैयार करके ग्राहकों को सौंपते हैं। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पुतलों में पटाखे व आतिशबाजी भरने का काम आयोजक समितियां स्वयं अपनी सुविधानुसार करवाती हैं।
20 अक्टूबर को होगा अधर्म पर धर्म की विजय का शंखनाद
रावण मंडी के अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी कारीगर पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पूरे जयपुर शहर को अब 20 अक्टूबर का इंतजार है, जब विजयादशमी के शुभ अवसर पर इन पुतलों का दहन किया जाएगा और एक बार फिर समाज में बुराई पर अच्छाई तथा अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश गूंजेगा।




