रायपुर/कांकेर 30 सितंबर 2026 : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में माओवादी फंड से जुड़ी 20 लाख रुपये की बरामद रकम के कथित बंटवारे और गायब होने के सनसनीखेज मामले में एक बड़ा नया मोड़ सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में फंसे दो पुलिस उप अधीक्षकों (DSP) पर लगे गंभीर आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है। कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल राखेचा ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर आगे की सख्त कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है।

मामले का पूरा घटनाक्रम
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जंगल से मिली थी बड़ी रकम: जानकारी के मुताबिक, पुलिस टीम को कांकेर के जंगलों में सर्चिंग के दौरान माओवादियों से जुड़ी 20 लाख रुपये की नकद राशि बरामद हुई थी।
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रकम गायब होने का आरोप: नियमानुसार इस बरामद राशि को विभागीय प्रक्रिया के तहत शासकीय कोष या मालखाने में जमा कराया जाना था, लेकिन आरोप है कि पूरी राशि जमा नहीं की गई और उसमें से एक बड़ा हिस्सा गायब कर दिया गया।
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दो DSP पर बंटवारे का आरोप: जांच के दौरान विभागीय स्तर पर यह बात सामने आई कि बरामद रकम के कथित बंटवारे में दो पुलिस उप अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारी शामिल थे।
SP ने वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा एजेंसियों की साख को देखते हुए उच्च स्तरीय विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।
कांकेर SP निखिल राखेचा ने घटनाक्रम, साक्ष्यों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब पुलिस मुख्यालय (PHQ) के वरिष्ठ अधिकारी इस रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे। समीक्षा के बाद ही दोनों DSP अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई का अंतिम फैसला लिया जाएगा।
निष्पक्ष जांच और आगे की प्रक्रिया
पुलिस महकमे से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और बरामद संपत्ति के रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि जब तक उच्च स्तर से जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी अधिकारी की अंतिम दोषसिद्धि तय नहीं मानी जा सकती हैं।



