नागपुर 16 मई: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को जान से मारने की धमकी देने और करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने के हाई-प्रोफाइल मामले में नागपुर की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों—जयेश पुजारी और अफसर पाशा—को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के सश्रम कारावास (कठोर कारावास) की सजा सुनाई है।
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यह ऐतिहासिक फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिलकुमार के. शर्मा की अदालत द्वारा सुनाया गया। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है और स्पष्ट किया है कि जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
मामले से जुड़ी मुख्य बातें
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गंभीर धाराएं: आरोपियों की संलिप्तता और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन पर आतंकवाद विरोधी कानून UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) समेत कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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पुख्ता पैरवी: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकारी पक्ष ने अदालत में बेहद मजबूत पैरवी की और दोषियों के खिलाफ कुल 65 गवाहों को कोर्ट में पेश किया।
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सुरक्षा पर सवाल: यह मामला नागपुर के धंतोली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि दोनों आरोपियों ने कर्नाटक की एक हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर से इस पूरी साजिश को अंजाम दिया था, जिसने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे।
क्या था पूरा मामला?
साल 2023 में इस सनसनीखेज मामले ने पूरे देश को चौंका दिया था। 14 जनवरी और 21 मार्च 2023 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित कार्यालय के लैंडलाइन नंबर पर बार-बार धमकी भरे फोन आए थे।
फोन करने वालों ने खुद को जेल से जुड़ा हुआ बताते हुए 100 करोड़ रुपये और 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती (रंगदारी) मांगी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई, तो वे दफ्तर को बम से उड़ा देंगे और केंद्रीय मंत्री की हत्या कर देंगे। जांच के बाद पुलिस ने कॉल लोकेशन को ट्रैक किया, तो पता चला कि ये सारे फोन कॉल कर्नाटक की ‘हिंडलगा सेंट्रल जेल’ के भीतर से किए जा रहे थे। लंबी कानूनी प्रक्रिया और कड़ी जांच के बाद अब नागपुर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को उनके किए की सजा सुना दी है।
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