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जग्गी हत्याकांड: क्या 20 अप्रैल को अमित जोगी की किस्मत लेगी नया मोड़? सस्पेंस बरकरार!

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▪️ दिग्गज वकीलों की दलीलों के बीच टिकी हैं निगाहें!

नई दिल्ली/रायपुर 6 अप्रैल 2026 ।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए अमित जोगी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से कोई फौरी राहत नहीं मिली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद देश की शीर्ष अदालत ने इस मामले की विस्तृत और संयुक्त सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। इस फैसले ने न केवल कानूनी गलियारों में बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी सस्पेंस गहरा दिया है।

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दोहरे मोर्चे पर कानूनी चुनौती

अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख आदेशों के खिलाफ मोर्चा खोला है:

1.CBI को मिली अपील की अनुमति: वह आदेश जिसके तहत सीबीआई को अमित जोगी के खिलाफ अपील करने का अधिकार मिला।

2.हाईकोर्ट का सजा का फैसला: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का वह ताजा निर्णय, जिसमें अमित जोगी को हत्या का मास्टरमाइंड बताते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में दिग्गज वकीलों का जमावड़ा

जानकारी के अनुसार अमित जोगी की ओर से देश के सबसे रसूखदार वकीलों की टीम मैदान में है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजीव मेहता की पीठ के सामने जिरह की।

वकीलों ने ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि:

“छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया। महज़ 40 मिनट की सुनवाई में एक ऐसे व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया गया जिसे पहले निचली अदालत ने बरी कर दिया था।”

20 अप्रैल की तारीख क्यों है महत्वपूर्ण?

सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को निर्देश दिया है कि वे 20 अप्रैल से पहले हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के खिलाफ अपनी विधिवत अपील दाखिल करें। कोर्ट अब इन सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ (Joint Hearing) सुनवाई करेगा।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, अमित जोगी को हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल तक सरेंडर करने का समय दिया है। ऐसे में 20 अप्रैल को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि उन्हें सरेंडर से राहत मिलेगी या उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा।

क्या था मामला?

4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 लोगों को उम्रकैद दी थी, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया था। अब 19 साल बाद हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को भी दोषी करार दिया है।

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