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“साहब, मेरा भाई लौटा दो…”: रायपुर के नामी अस्पताल का सेप्टिक टैंक बना ‘मौत का कुआं’, 3 सफाईकर्मियों ने तोड़ा दम

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रायपुर (छत्तीसगढ़)। पचपेड़ी नाका स्थित प्रतिष्ठित रामकृष्ण केयर अस्पताल में मंगलवार की रात लापरवाही की एक ऐसी कहानी लिखी गई, जिसने तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के रिसाव ने तीन बेगुनाह सफाईकर्मियों की जान ले ली। यह हादसा अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार की उस घोर अनदेखी का नतीजा है, जहाँ इंसानी जान की कीमत चंद रुपयों से भी कम आंकी गई।

मौत का जाल और मासूम जिंदगियां

हादसा रात करीब 8 बजे हुआ जब एक बाहरी कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी के माध्यम से इन कर्मियों को टैंक साफ करने के लिए बुलाया गया था।

  • अनमोल मांझी (25)

  • गोविंद सेंद्रे (35)

  • सत्यम कुमार (22)

जैसे ही पहला कर्मचारी टैंक के भीतर उतरा, वह जहरीली गैस की चपेट में आकर अचेत हो गया। उसे बचाने की कोशिश में उसके दो अन्य साथी भी एक-एक कर मौत के इस कुएं में समा गए। चीख-पुकार मचने के बाद चौथे कर्मचारी को किसी तरह बाहर निकाला गया, जिसकी हालत फिलहाल नाजुक बनी हुई है।

परिजनों का विलाप और अस्पताल में पथराव

घटना की खबर मिलते ही मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और सिसकियों के बीच एक ही आवाज गूँज रही थी— “मेरा भाई मुझे लौटा दो, अस्पताल वालों ने उसे मार डाला।” परिजनों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर या हार्नेस बेल्ट के सीधे मौत के मुंह में धकेल दिया गया। गुस्साए लोगों ने अस्पताल के बाहर पत्थरबाजी की और जमकर नारेबाजी की।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका

हंगामे को देखते हुए टिकरापारा थाना पुलिस समेत भारी सुरक्षा बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से शुरुआती टालमटोल के बाद अब मामले की जांच की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद हाथ से मैला ढोने और बिना मशीनों के सफाई करवाने पर अब प्रशासन भी सवालों के घेरे में है।


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