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छत्तीसगढ़ के ‘गांधी’ पवन दीवान की पुण्यतिथि कल: राजिम आश्रम में जुटेगा श्रद्धा का सैलाब, गूंजेंगे मंत्र

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राजिम/गरियाबंद | 08 फरवरी 2026 छत्तीसगढ़ी माटी के अनमोल रत्न, प्रख्यात संत कवि और राजनीति के शिखर पुरुष स्वामी अमृतानंद (पवन दीवान) की पुण्यतिथि कल, 9 फरवरी (सोमवार) को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। राजिम स्थित ब्रह्मचर्य आश्रम में इस अवसर पर विशेष श्रद्धांजलि सभा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है।

श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की रूपरेखा

स्वामी अमृतानंद (पवन दीवान) स्मृति छत्तीसगढ़ ब्रह्मचर्य आश्रम न्यास समिति राजिम के अध्यक्ष संतोष उपाध्याय, सचिव अनिल तिवारी, सहसचिव संदीप तिवारी, सदस्य राजेश्री महंत डॉ रामसुंदर दास, केके पुराणिक, लोकेश पांडे, युवराज शर्मा, केके शर्मा, विकास तिवारी, दिनेश शर्मा ने बताया कि पुण्यतिथि पर आश्रम में ‘दीवान जी’ को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निम्नलिखित गतिविधियां होंगी:

  • चरण पादुका पूजन: श्री राजीव लोचन मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर पुरुषोत्तम मिश्रा के अनुसार, सुबह दीवान जी की चरण पादुका का विधि-विधान से पूजन होगा।

  • मंत्रोच्चार: संस्कृत विद्यापीठ के छात्रों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें याद किया जाएगा।

  • प्रसाद वितरण: आयोजन के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है।

बहुआयामी व्यक्तित्व: एक नजर में

पवन दीवान जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता के रक्षक थे। उन्हें ‘छत्तीसगढ़ का गांधी’ कहा जाता है। उनके जीवन के कुछ प्रमुख पड़ाव:

साहित्यिक योगदान: उन्होंने ‘अंबर का आशीष’ जैसी कालजयी कृतियों की रचना की।

राजनीतिक सफर: अविभाजित मध्य प्रदेश में जेल मंत्री और महासमुंद लोकसभा से दो बार सांसद रहे। डॉ. रमन सिंह सरकार में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष का पद भी संभाला।

कथा वाचक: श्रीमद् भागवत महापुराण के वे इतने ओजस्वी वक्ता थे कि उनकी कथा सुनने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ता था।

राज्य निर्माण: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन में उनकी भूमिका अग्रणी रही।

बता दें कि जन-जन के प्रिय दीवान जी 2 मार्च 2016 को ब्रह्मलीन हुए थे, लेकिन उनकी यादें और उनके विचार आज भी छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जीवित हैं।