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RSS के ‘मजदूर संघ’ ने अपनी ही सरकार को घेरा: बजट को बताया ‘श्रमिक विरोधी’, बोले- पूंजीपतियों का रखा ख्याल

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नई दिल्ली, 02 फरवरी: केंद्रीय बजट 2026-27 के पेश होते ही मोदी सरकार को अपने ही परिवार के भीतर से कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन, भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने बजट को ‘कॉर्पोरेट केंद्रित’ बताते हुए इसे वर्किंग क्लास के लिए निराशाजनक करार दिया है।

प्रमुख आपत्तियां: क्यों भड़का संघ का संगठन?

बीएमएस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं। संगठन का कहना है कि बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल है, जो श्रमिकों की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।

  • पूंजीवाद बनाम श्रमिक: बीएमएस के अनुसार, बजट में औद्योगिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तो अरबों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उन उद्योगों को चलाने वाले श्रमिकों के वेतन और सुरक्षा पर चुप्पी साध ली गई है।

  • असंगठित क्षेत्र के साथ अन्याय: गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के करीब 90% मजदूरों के लिए किसी समर्पित ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ का न होना बजट की सबसे बड़ी विफलता बताई गई है।

  • महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी: जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा का मोर्चा संभालने वाली आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी न करने को ‘असंवेदनशील’ कदम बताया गया है।

  • पेंशन और वेतन आयोग: ईपीएस-95 (EPS-95) न्यूनतम पेंशन में वृद्धि न होने और 8वें वेतन आयोग पर कोई स्पष्टता न मिलने से सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों में भारी असंतोष है।

“संवाद का कोई लाभ नहीं हुआ”

बीएमएस ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि पूर्व-बजट बैठकों के दौरान उन्होंने सरकार को कई सुझाव और मांगे सौंपी थीं। लेकिन बजट में उन मांगों की पूरी तरह से अनदेखी करना यह दर्शाता है कि सरकार केवल निजीकरण और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देना चाहती है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों का हनन होगा।

निष्कर्ष: देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन BMS का यह कड़ा रुख केंद्र सरकार के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर RSS की जमीनी विचारधारा और उसके विशाल ‘वोट बैंक’ से जुड़ा मामला है।

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