रायपुर / बिलाईगढ़ 16 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलाईगढ़ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें पद से हटाने के राज्य सरकार के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है।
क्या है पूरा मामला?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 2.45 हेक्टेयर कृषि भूमि को बिना वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस और बिना भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Conversion) के 57 आवासीय प्लॉटों में विभाजित कर अवैध प्लॉटिंग की गई थी। अध्यक्ष बनने के बाद दुबे ने इस मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए 4 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम की धारा 41-ए के तहत दुबे को अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया था और उन्हें आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
याचिकाकर्ता (दामोदर प्रसाद दुबे) की दलील
दुबे ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि जमीन की खरीद-बिक्री का मामला 2013 से 2024 के बीच का है, जबकि वे फरवरी 2025 में अध्यक्ष चुने गए थे। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े विवादों के लिए धारा 20 के तहत चुनाव याचिका का प्रावधान है, ऐसे में सीधे बर्खास्त करना गलत है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट न देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया।
हाईकोर्ट का निर्णय
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
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चुनाव रद्द करना और पद से हटाना अलग: अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव को अमान्य ठहराना और धारा 41-ए के तहत पद से हटाना दो अलग-अलग वैधानिक प्रक्रियाएं हैं।
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पूर्व की घटनाएं भी आधार: अध्यक्ष चुने जाने से पहले की गई अनियमितताओं के आधार पर पद से हटाने की कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता।
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प्राकृतिक न्याय का पालन: याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जवाब का अवसर मिला और व्यक्तिगत सुनवाई भी दी गई, इसलिए प्राकृतिक न्याय का पूरी तरह पालन हुआ है।
3.27 करोड़ रुपये के जुर्माने पर राहत
हालाँकि हाईकोर्ट ने पद से हटाने के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन CMO द्वारा 24 अप्रैल 2026 को लगाए गए 3,27,04,740 रुपये के जुर्माने के मामले में दुबे को कलेक्टर के समक्ष वैधानिक अपील दायर करने की छूट दी है। कलेक्टर इस अपील पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेंगे।




