बिलासपुर छत्तीसगढ़ 6 अक्टूबर 2026 : कहते हैं चिराग तले अंधेरा होता है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो हर कोई हैरान रह जाता है। न्यायधानी बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र स्थित सागरदीप कॉलोनी में हुई एक सनसनीखेज चोरी का जब खुलासा हुआ, तो पुलिस के भी होश उड़ गए। जिस घर में चोरी हुई, उसका मास्टरमाइंड कोई बाहरी चोर नहीं, बल्कि उसी परिवार का बेटा आशीष मिश्रा निकला। आरोपी आशीष छत्तीसगढ़ पुलिस में आरक्षक के पद पर तैनात था, जो अपनी संदिग्ध गतिविधियों और नशे की लत के चलते निलंबित चल रहा है।

दरअसल, सागरदीप कॉलोनी की रहने वाली वृंदावती मिश्रा जब तीज पर्व मनाने अपने मायके रीवा गई हुई थीं, तब पीछे से सूने मकान का ताला तोड़कर अलमारी से सोने-चांदी के बहुमूल्य जेवरात और नकदी पार कर दिए गए। महिला के वापस लौटने पर जब चोरी का पता चला, तो उन्होंने सकरी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस को शुरुआत से ही किसी करीबी पर शक था। जब घर के सदस्य और निलंबित आरक्षक बेटे आशीष मिश्रा की गतिविधियों की बारीकी से जांच की गई, तो उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर आशीष टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि नशे की जरूरतों और महंगे शौक को पूरा करने के लिए उसने अपने दो साथी—सूरज सिंह ठाकुर उर्फ मोना (27 खोली) और अनुराग चौधरी उर्फ लालू (उसलापुर)—के साथ मिलकर अपने ही घर में डाका डालने का पूरा प्लान रचा था।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी निशानदेही पर चोरी गए पूरे जेवरात और वारदात में इस्तेमाल की गई बुलेट मोटरसाइकिल को बरामद कर लिया गया है। सीएसपी परमेश्वर तिलकवार ने बताया कि आरोपी को अपने पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी, लेकिन नशे और काम में लापरवाही के कारण उसे सस्पेंड कर दिया गया था। फिलहाल तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, वहीं पुलिस अब इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।




