Latest News
मैच ग्रुप की नई पहल: टिंडर और हिंज पर स्क्रीनशॉट बंद, सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और I4C से हाथ मिलाया कोरबा में खूनी संघर्ष: रावण दहन देखने आए युवक की चाकू मारकर हत्या, तीन गिरफ्तार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में हुए शामिल, आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की भाजयुमो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा: छत्तीसगढ़ के भूपेंद्र नाग बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अनमोल झा को मिला सदस्य का पद छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रभारी स्मृति ईरानी की नेताओं को सख्त हिदायत कोरबा: रावण दहन के बाद मुड़ापार में खूनी वारदात, चाकू के वार से युवक की मौत; जांच में जुटी पुलिस
Home » देश » समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत: 43,500 टन वजनी पहला स्वदेशी सपोर्ट शिप ‘INS सूर्य’ हुआ लॉन्च

समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत: 43,500 टन वजनी पहला स्वदेशी सपोर्ट शिप ‘INS सूर्य’ हुआ लॉन्च

Share:

 

 विशाखापट्टनम 7 अक्टुबर 2026 Indian Navy : भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को एक बड़ा विस्तार देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में देश के पहले स्वदेशी Fleet Support Ship (FSS-1) ‘INS सूर्य’ का जलावतरण (लॉन्च) किया। लगभग 43,500 टन वजनी यह विशाल युद्धपोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक पकड़ को नए स्तर पर ले जाएगा।

लॉन्च कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • एक साथ दो मील के पत्थर: HSL में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जहाँ पहली Fleet Support Ship ‘INS सूर्य’ को पानी में उतारा गया, वहीं श्रृंखला की पांचवीं सपोर्ट शिप (FSS-5) की कील (Keel) भी रखी गई।

  • समय सीमा में उपलब्धि: इस जहाज की स्टील कटिंग के महज 18 महीने के भीतर इसे लॉन्च कर दिया गया, जो HSL की तकनीकी और निर्माण क्षमता में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

  • ₹19,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: भारतीय नौसेना के लिए कुल 5 ऐसे Fleet Support Ships का निर्माण किया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग ₹19,000 करोड़ है।

समंदर में ‘INS सूर्य’ की क्या होगी भूमिका?

Fleet Support Ship का मुख्य कार्य सीधे मोर्चे पर युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र के बीच में तैनात भारतीय युद्धपोतों को लगातार रसद और बैकअप प्रदान करना है।

  1. समुद्र में ही री-फ्यूलिंग और री-सप्लाई: INS सूर्य समुद्र के बीचों-बीच युद्धपोतों को ईंधन, पीने का पानी, गोला-बारूद, हथियार और खाद्य सामग्री पहुंचाएगा।

  2. पोर्ट पर निर्भरता कम: इस सुविधा से भारतीय युद्धपोतों को बार-बार नजदीकी बंदरगाह (पोर्ट) पर लौटने की आवश्यकता नहीं होगी।

  3. एंड्योरेंस में बढ़ोतरी: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना की उपस्थिति और लंबे समय तक तैनात रहने (endurance) की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

INS सूर्य की प्रमुख विशेषताएं

  • विशाल पेलोड क्षमता: इसमें भारी मात्रा में तरल पदार्थ (ईंधन/पानी) और सूखा कार्गो स्टोर करने के बड़े चैंबर बने हैं।

  • ऑनबोर्ड मेंटेनेंस वर्कशॉप: जहाज पर एक ‘फर्स्ट-लाइन मेंटेनेंस वर्कशॉप’ मौजूद है, जिससे समुद्र में ही अन्य जहाजों या खुद की तकनीकी खराबी को ठीक किया जा सके।

  • हेलीकॉप्टर डेक: मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर्स के संचालन के लिए एक आधुनिक हेलीकॉप्टर डेक दिया गया है।

  • आत्मरक्षा प्रणाली: अपनी सुरक्षा के लिए इसमें डिफेंस सिस्टम भी एकीकृत किए गए हैं।

शिपयार्ड का इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

इस आयोजन के दौरान रक्षा मंत्री ने HSL में अपग्रेड किए गए Slipway-4 और 300 टन क्षमता वाली Goliath Crane का भी उद्घाटन किया। इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण HSL अब 45,000 DWT (डेडवेट टनेज) तक के विशाल और जटिल व्यावसायिक व सैन्य जहाजों का निर्माण और लॉन्चिंग आसानी से कर सकेगा।