Mountain Chickadee :अमेरिका के सिएरा नेवादा पहाड़ों में कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे के तापमान के बीच एक नन्हीं चिड़िया अपनी अनोखी दिमागी क्षमता के बल पर जीवित रहती है. पेंसिल जितनी हल्की इस चिड़िया का नाम माउंटेन चिकैडी (गोशूट भाषा में ‘अनी की’) है. सर्दियां शुरू होने से पहले यह चिड़िया लगभग एक लाख चीड़ के बीज (पाईन नट्स) बर्फ और पेड़ों की दरारों में छिपा देती है और आश्चर्यजनक रूप से इसे हर एक बीज का सटीक ठिकाना याद रहता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा, रीनो (UNR) के शोधकर्ता वर्ष 1999 से कैलिफोर्निया स्थित ‘सेजहेन क्रीक फील्ड स्टेशन’ में इस पक्षी के व्यवहार और दिमाग पर अध्ययन कर रहे हैं. शोध के दौरान मिली मुख्य जानकारियां:
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याददाश्त और जेनेटिक्स का संबंध: ऑटोमैटिक फीडर्स के जरिए हर साल करीब 250 चिड़ियाओं की याददाश्त का परीक्षण किया जाता है. स्टडी में पाया गया कि चिकैडी चिड़ियों की दिमागी क्षमता और याददाश्त का 80% हिस्सा उनके जेनेटिक्स पर निर्भर करता है.
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उम्र के साथ नहीं घटती याददाश्त: इंसानों और अन्य जीवों के विपरीत, बूढ़ी चिकैडी चिड़ियों की याददाश्त में उम्र बढ़ने पर भी कोई गिरावट नहीं आती. वे जीवनभर उतनी ही तेज-तर्रार रहती हैं.
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गट माइक्रोबायोम का असर: शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन चिड़ियों की याददाश्त सबसे बेहतर होती है, उनके पेट में ‘शॉर्ट-चेन फैटी एसिड’ बनाने वाले बैक्टीरिया अधिक होते हैं, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं.
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जीवनकाल पर असर: कड़ाके की ठंड में दो-तिहाई (66%) चिड़िया अपनी पहली ही सर्दी में दम तोड़ देती हैं. हालांकि, जिनका दिमाग तेज होता है, वे न केवल विपरीत परिस्थितियों में बच निकलती हैं, बल्कि 10 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहती हैं.
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मादा पक्षियों की पसंद: अध्ययन में यह भी सामने आया कि मादा चिकैडी अपने लिए अधिक होशियार और तेज दिमाग वाले नरों को साथी चुनना पसंद करती हैं ताकि उनके बच्चों में बेहतर जीन ट्रांसफर हो सकें.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नन्हीं चिड़िया की याददाश्त बनाए रखने की क्षमता को समझकर भविष्य में इंसानों में उम्र के साथ घटने वाली याददाश्त (जैसे अल्जाइमर या डिमेंशिया) को रोकने में मदद मिल सकती है.




