Latest News
अखिलेश यादव और धीरेंद्र शास्त्री विवाद: यूपी चुनाव से पहले भगवान कृष्ण पर दिए बयान ने क्यों गरमाई सियासत? कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना क्यों है जरूरी? केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिया जवाब दो बच्चों की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कहा—’जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर राजनीतिक अधिकारों से वंचित करना गलत’ कांकेर में पीडीएस व्यवस्था होगी सुदृढ़: 111 जर्जर और 26 भवनविहीन राशन दुकानों के कायाकल्प का प्रस्ताव तैयार छत्तीसगढ़ राज्योत्सव: कोरबा में स्वामित्व योजना के 200 हितग्राहियों को मिले अधिकार अभिलेख IMD Weather Alert: 13 राज्यों में भारी बारिश और 90 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी का अलर्ट, जानें आज के मौसम का हाल
Home » Uncategorized » Chhattisgarh की सियासत गरमाई: “आरक्षण पर विवादित टिप्पणी: कांग्रेस बोली- सरकार की चुप्पी बर्दाश्त नहीं, सड़क से सदन तक होगा विरोध”

Chhattisgarh की सियासत गरमाई: “आरक्षण पर विवादित टिप्पणी: कांग्रेस बोली- सरकार की चुप्पी बर्दाश्त नहीं, सड़क से सदन तक होगा विरोध”

Share:

रायपुर 1 अगस्त  Reservation Controversy :  छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग की पत्रिका के सलाहकार संपादक डॉ. अनिल द्विवेदी द्वारा सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के करोड़ों आरक्षित वर्ग के नागरिकों का सीधा अपमान करार दिया है।

Advt

संविधान और सामाजिक न्याय का खुला उल्लंघन

डॉ. चरणदास महंत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरक्षण देश के संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक न्याय का एक मौलिक अधिकार है। आरक्षण प्राप्त करने वाले वर्गों की तुलना आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों से करना किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण वंचित और आरक्षित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा लेना या केवल खेद प्रकट कर देना इस कृत्य के गंभीर प्रभाव को कम नहीं करता। नेता प्रतिपक्ष ने बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी संकीर्ण और आपत्तिजनक मानसिकता रखने वाले व्यक्ति को शासन के जनसंपर्क विभाग में इतने महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई?

मुख्यमंत्री की चुप्पी पर खड़े किए गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को घेरते हुए कहा कि जनसंपर्क विभाग का प्रभार स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, और वे खुद आदिवासी समाज का नेतृत्व करते हैं। इसके अलावा, मंत्रिमंडल में भी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं। ऐसी स्थिति में इस अत्यंत संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री की लंबी चुप्पी से प्रदेश के आरक्षित वर्गों के बीच बेहद गलत और नकारात्मक संदेश जा रहा है। सरकार की यह खामोशी दुर्भाग्यपूर्ण और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन का ऐलान

संत रविदास जयंती जैसे पवित्र अवसर का जिक्र करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि जहाँ एक ओर पूरा देश सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दे रहा है, वहीं शासन के एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि कांग्रेस पार्टी इस गंभीर मुद्दे को शांत नहीं बैठने देगी। पार्टी प्रदेश के हर शहर, कस्बे और गांव तक जाकर इस मामले में सरकार से कड़ा जवाब मांगेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सामाजिक न्याय के अधिकार और आरक्षित वर्ग के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

#