नई दिल्ली 11 जुलाई (IPS Officers) : देश की सबसे प्रतिष्ठित और रौबदार नौकरियों में से एक ‘इंडियन पुलिस सर्विस’ (IPS) इन दिनों एक अलग ही वजह से सुर्खियों में है। पिछले कुछ समय से युवा और होनहार आईपीएस अधिकारियों द्वारा लगातार दिए जा रहे इस्तीफों ने प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) ताजा मामला ओडिशा कैडर के 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा का है, जिन्होंने भुवनेश्वर में डीसीपी के पद पर तैनात रहने के दौरान बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप अपना इस्तीफा सरकार को भेज दिया।
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जगमोहन मीणा पिछले 14 महीनों के भीतर इस्तीफा देने वाले सातवें आईपीएस अधिकारी बन गए हैं। अधिकारियों के नौकरी छोड़ने का यह सिलसिला तब देखने को मिल रहा है, जब देश में पहले से ही पुलिस सेवा में अधिकारियों की भारी कमी है।

एक तरफ 500+ पद खाली, दूसरी तरफ इस्तीफों की झड़ी
केंद्रीय राज्य मंत्री (पीएमओ) जितेंद्र सिंह ने संसद (लोकसभा) में एक सवाल के जवाब में आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया था कि देश में आईपीएस के 505 पद अभी भी रिक्त हैं। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट भी सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि आईपीएस अधिकारियों की कमी के कारण देश की प्रमुख जांच एजेंसियों— इंटेलिजेंट ब्यूरो (IB) और सीबीआई (CBI) में 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं। ऐसे संकट के समय में युवा अधिकारियों का सेवा छोड़ना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
40 से कम उम्र के युवाओं में ज्यादा मोहभंग
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात इन अधिकारियों की उम्र है। पिछले 14 महीनों में इस्तीफा देने वाले 7 अधिकारियों में से 6 अधिकारियों की उम्र 40 साल से कम है।
| अधिकारी का नाम | इस्तीफा देते समय उम्र | कैडर/कार्यक्षेत्र |
|---|---|---|
| काम्या मिश्रा | 32 वर्ष | बिहार कैडर |
| अभिषेक तिवारी | 33 वर्ष | मध्य प्रदेश कैडर |
| सिद्धार्थ कौशल | 35 वर्ष | आंध्र प्रदेश कैडर |
| रचिता जुयाल | 35 वर्ष | उत्तराखंड कैडर |
| जगमोहन मीणा | 37 वर्ष | ओडिशा कैडर |
| लोकेश्वर सिंह | 38 वर्ष | हिमाचल/उत्तराखंड कैडर |
| नुरुल होदा | 40+ वर्ष | बिहार (SPS से IPS) |
आंकड़े साफ बताते हैं कि 40 की उम्र पार कर चुके केवल एक अधिकारी (नुरुल होदा) ने इस्तीफा दिया, जबकि बाकी सभी अपने करियर के सबसे बेहतरीन पड़ाव पर थे।
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इन सात अधिकारियों के इस्तीफों के पीछे की इन-डेप्थ स्टडी की जाए, तो इसके पीछे तीन मुख्य वजहें सामने आती हैं:
1. राजनीति में एंट्री और वैचारिक मतभेद
बिहार कैडर की तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा और नुरुल होदा का इस्तीफा राजनीतिक झुकाव और कारणों से जुड़ा माना जा रहा है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) नुरुल होदा ने वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया और उसके बाद सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वहीं, काम्या मिश्रा के बारे में भी राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
2. कॉरपोरेट सेक्टर और ग्लोबल करियर का आकर्षण
आंध्र प्रदेश के आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ कौशल ने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहकर कॉरपोरेट जगत का रुख किया और वर्तमान में वे रिलायंस इंडस्ट्रीज में एक बड़े पद पर कार्यरत हैं। वहीं, उत्तराखंड के लोकेश्वर सिंह ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक बेहतरीन अवसर मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया। मध्य प्रदेश कैडर के अभिषेक तिवारी ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए पद छोड़ा, क्योंकि पुलिस सेवा में रहते हुए भी उनका अधिकांश समय साइबर अपराधों की जांच में ही बीतता था।
3. बढ़ता सियासी और प्रशासनिक दबाव
युवा अधिकारियों के इस कदम पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। ओडिशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भक्त चरण दास ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, “जिस तरीके से युवा और काबिल अधिकारी अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं, वह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकार को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि आखिर इन युवाओं पर ऐसा क्या दबाव है कि वे देश की सबसे बड़ी सेवा छोड़ रहे हैं।”
कानूनी पक्ष: क्या आईपीएस अधिकारी इस्तीफा दे सकते हैं?
क्या कहता है नियम? हां, ऑल इंडिया सर्विस रूल्स, 1958 के तहत अधिकारियों को इस्तीफा देने का अधिकार है। हालांकि, इनका इस्तीफा राज्य सरकार नहीं, बल्कि केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) स्वीकार करती है। जब तक केंद्र से इस्तीफा मंजूर नहीं हो जाता, तब तक अधिकारी को अपने पद पर बने रहना अनिवार्य होता है।
पेंशन और वापसी के नियम:
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सर्विस रूल्स 5(1): यदि कोई अधिकारी तय उम्र से पहले खुद इस्तीफा देता है, तो उसे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले किसी भी प्रकार के सरकारी लाभ या पेंशन की पात्रता नहीं होती। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार ‘दया आधारित भत्ता’ (Compassionate Allowance) दे सकती है।
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वापसी का मौका (U-Turn): नियमों के मुताबिक, इस्तीफा देने के बाद भी अधिकारियों को विचार करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाता है। अगर कोई अधिकारी 90 दिन के भीतर अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन करता है, तो उसके पिछले सर्विस रिकॉर्ड को देखकर उसे सेवा में बहाल किया जा सकता है।
युवा आईपीएस अधिकारियों का यह ट्रेंड प्रशासनिक ढांचे में बदलाव, काम के बढ़ते दबाव और निजी आकांक्षाओं के बीच संतुलन की एक नई बहस को जन्म दे रहा है।📍




