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छत्तीसगढ़ की ‘दीदियां’ बनीं बिजनेस मैनेजर: बाहरी एजेंसियों की छुट्टी, अब महिलाएं खुद बना और बेच रहीं ‘रेडी-टू-ईट’ पोषण आहार

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल लाई रंग: 6 जिलों में महिलाओं ने संभाली कमान, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े कदम

रायपुर / सूरजपुर, 22 मई 2026

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों से बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘रेडी-टू-ईट’ (पूरक पोषण आहार) योजना अब केवल कुपोषण के खिलाफ जंग नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। कभी घरों के चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली छत्तीसगढ़ की ‘दीदियां’ आज आधुनिक मशीनों को ऑपरेट कर रही हैं और एक कुशल बिजनेस मैनेजर की तरह उत्पादन से लेकर सप्लाई चेन तक का पूरा प्रबंधन संभाल रही हैं।

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स्वावलंबन का नया अध्याय: बाहरी ठेकेदारों की छुट्टी

इस नई नीति से राज्य में एक बड़ा नीतिगत बदलाव आया है। पहले आंगनबाड़ियों के लिए पोषण आहार बनाने का काम बाहरी बड़ी एजेंसियों या ठेकेदारों के पास था, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल पाता था। मुख्यमंत्री श्री साय की पहल पर अब बाहरी एजेंसियों को हटाकर यह जिम्मेदारी सीधे गांव के महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को सौंप दी गई है। नतीजा यह है कि आज गांव का पैसा गांव में ही रह रहा है और हजारों महिलाओं को घर के पास ही सम्मानजनक रोजगार मिल गया है।

“जब हमारी ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और तकनीकी प्रशिक्षण मिलता है, तो वे कमाल कर सकती हैं। यह मॉडल साबित कर रहा है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब सिर्फ श्रमिक नहीं, बल्कि सफल उद्यमी (Entrepreneurs) बन चुकी हैं।”

— श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े, महिला एवं बाल विकास मंत्री

पायलट प्रोजेक्ट से सफलता की उड़ान

प्रथम चरण में राज्य के 6 जिलों—रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।

  • 42 महिला समूहों का नेटवर्क: इन जिलों के 42 स्व-सहायता समूहों को उत्पादन इकाइयों की चाबी सौंपी गई है।

  • मशीन से लेकर मुनीम तक का काम: इन फैक्ट्रियों में महिलाएं खुद मशीनें चलाती हैं, लैब में भोजन की गुणवत्ता (Quality) चेक करती हैं, सुरक्षित पैकेजिंग करती हैं और मुनाफे का लेखा-जोखा (अकाउंट्स) भी खुद संभालती हैं।

सूरजपुर की दीदियों ने पेश की मिसाल, बना रहीं ‘शक्ति आहार’

सूरजपुर जिले के भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में लगी उत्पादन इकाइयां आज तरक्की का केंद्र बन चुकी हैं। यहाँ की दीदियां विटामिन ‘ए’, ‘डी’, आयरन, कैल्शियम और जिंक से भरपूर पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं।

निर्माण के साथ-साथ इन पैकेटों को आंगनबाड़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा भी महिलाओं के ही पास है। अकेले सूरजपुर में लगभग 430 महिलाएं इस वितरण व्यवस्था (सप्लाई चेन) से जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

बढ़ा आत्मविश्वास, समाज में मिला नया सम्मान

इस पहल का सबसे सकारात्मक प्रभाव महिलाओं के आत्मविश्वास पर पड़ा है। हर महीने होने वाली नियमित और सम्मानजनक आय से वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हैं और परिवार के आर्थिक निर्णयों में उनकी बात सुनी जा रही है। छत्तीसगढ़ का यह “पोषण के साथ सशक्तिकरण” मॉडल आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।

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