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क्या नीतीश कुमार बनेंगे देश के नए डिप्टी पीएम? मोदी कैबिनेट में ‘चाणक्य’ की एंट्री के मायने!

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नई दिल्ली 7 मार्च 2026 : भारतीय राजनीति में ‘पलटीमार’ और ‘सुशासन बाबू’ जैसे नामों से मशहूर नीतीश कुमार एक बार फिर देश के सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का केंद्र बन गए हैं। एनडीए के घटक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों द्वारा राज्यसभा नामांकन की रेस में नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर चमक रहा है। यह महज एक सीट का बदलाव नहीं, बल्कि देश की सत्ता के शीर्ष समीकरणों में आने वाले बड़े बदलाव की आहट है।


बिहार की सत्ता का मोह और दिल्ली की ‘बड़ी’ तैयारी

दो दशकों तक बिहार की सत्ता की धुरी रहने वाले नीतीश कुमार आखिर क्यों मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने को तैयार हुए? राजनीतिक गलियारों में इसके पीछे दो मुख्य तर्क दिए जा रहे हैं:

  1. भाजपा का दबाव: क्या नीतीश कुमार अब भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच बिहार में खुद को सीमित पा रहे हैं?

  2. राजनीति की ‘अंतिम पारी’: माना जा रहा है कि नीतीश बाबू अब अपनी पारी का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम अध्याय दिल्ली के केंद्र में लिखना चाहते हैं।

डिप्टी पीएम का पद: क्या यह केवल कयास है?

राजनैतिक पंडितों का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार को मजबूती देने में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की भूमिका ‘किंगमेकर’ वाली है। ऐसे में नीतीश कुमार जैसा कद्दावर नेता, जो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुका है, केवल एक साधारण मंत्री बनकर संतुष्ट नहीं होगा।

▪️अनुभव का भार: नीतीश कुमार वर्तमान सरकार के लगभग सभी मंत्रियों से वरिष्ठ हैं।

▪️रणनीतिक पकड़: गठबंधन की राजनीति में उनकी पकड़ बेजोड़ है।

▪️बड़ा ओहदा: चर्चा आम है कि उन्हें उप-प्रधानमंत्री (Deputy PM) की जिम्मेदारी दी जा सकती है ताकि गठबंधन में एक मजबूत संतुलन बना रहे।


विशेषज्ञों की राय: ‘बिना मास्टर प्लान के नीतीश कोई कदम नहीं उठाते’

‘चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च’ के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा के अनुसार, नीतीश कुमार का सीएम की कुर्सी छोड़ने का फैसला चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन यह किसी बड़े खेल की शुरुआत है। वह केंद्र में अपनी वरिष्ठता के अनुरूप ही पद स्वीकार करेंगे।

निष्कर्ष: यदि आने वाले दिनों में नीतीश कुमार लाल किले की प्राचीर के करीब और रायसीना हिल्स के गलियारों में दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में दिखें, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।


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