Home » देश » अब अस्पताल में ‘कुत्ता प्रबंधन’ करेंगे डॉक्टर: स्टेथोस्कोप के साथ संभालनी होगी डंडे की कमान, नोडल ऑफिसर नियुक्त

अब अस्पताल में ‘कुत्ता प्रबंधन’ करेंगे डॉक्टर: स्टेथोस्कोप के साथ संभालनी होगी डंडे की कमान, नोडल ऑफिसर नियुक्त

Share:

अब अस्पताल में ‘कुत्ता प्रबंधन’ करेंगे डॉक्टर

जोधपुर/जैसलमेर | राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में अब डॉक्टरों के कामकाज की परिभाषा बदलने वाली है। मरीजों की नब्ज टटोलने वाले हाथ अब अस्पताल परिसर से आवारा कुत्तों को बाहर रखने का खाका खींचेंगे। राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जोधपुर और जैसलमेर के तीन बड़े अस्पतालों में बाकायदा डॉक्टरों को ‘डॉग नोडल ऑफिसर’ नियुक्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।

क्या होगी डॉक्टर साहब की ‘नई ड्यूटी’?

जारी आदेशों के अनुसार, इन नोडल अधिकारियों का काम सिर्फ इलाज करना नहीं, बल्कि अस्पताल को ‘डॉग फ्री जोन’ बनाना होगा। इनकी मुख्य जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:

  • नगर निगम से तालमेल: अस्पताल में कुत्ते दिखने पर तुरंत नगर परिषद की टीम को बुलाकर उन्हें पकड़वाना।

  • दीवारों की पैमाइश: बाउंड्री वॉल कहीं से नीची तो नहीं? इसकी रिपोर्ट देना और उसे ऊंचा करवाना ताकि कुत्ते अंदर न कूद सकें।

  • गेट प्रबंधन: अस्पताल के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और यह देखना कि गेट बंद रहें।

  • साप्ताहिक रिपोर्टिंग: उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की रिपोर्ट भेजना।

डेंटिस्ट को कमान, जोधपुर-जैसलमेर में आदेश लागू

जोधपुर के प्रतापनगर अस्पताल में डॉ. नरेश चौहान और मंडोर सैटेलाइट में डॉ. निर्मला बिश्नोई को यह जिम्मेदारी मिली है। वहीं, जैसलमेर के जवाहिर अस्पताल में डेंटिस्ट डॉ. सरदाराराम पंवार को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जैसलमेर पीएमओ डॉ. रविंद्र सांखला ने पुष्टि की है कि अस्पताल परिसर को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।


व्यंग्य का कोना: अब ‘हुर्र-हुर्र’ करेंगे डॉक्टर साहब!

सिस्टम की बलिहारी देखिए! पहले जनगणना और चुनाव ड्यूटी में उलझे शिक्षकों के बाद अब डॉक्टरों की ‘किस्मत’ खुली है। अब डॉक्टर साहब मरीज से यह नहीं कहेंगे कि ‘लंबी सांस लो’, बल्कि गार्ड से कहेंगे ‘जरा लंबी लाठी लाओ’। देखना दिलचस्प होगा कि डेंटिस्ट साहब कुत्तों का इलाज करेंगे या उन्हें देखकर सिर्फ दांत पीसकर रह जाएंगे। सोशल मीडिया पर लोग चुटकी ले रहे हैं कि अगला कोर्स शायद ‘कैनिन मैनेजमेंट’ (श्वान प्रबंधन) का न शुरू हो जाए!

Leave a Comment