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कोरबा: नगर सैनिकों के आंदोलन के आगे झुका प्रशासन, जिला सेनानी हटाए गए

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बर्खास्त जवान के सुसाइड प्रयास के बाद भड़का था आक्रोश; जांजगीर की योग्यता साहू को कोरबा का अतिरिक्त प्रभार

कोरबा छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पिछले दो दिनों से जारी नगर सैनिकों (होमगार्ड) का गतिरोध अंततः जिला सेनानी (डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट) अनुज कुमार एक्का के तबादले के साथ समाप्त हो गया है। प्रशासन द्वारा मांगें पूरी किए जाने के आश्वासन के बाद सभी जवान हड़ताल खत्म कर काम पर लौट आए हैं।

विवाद की जड़: जवान का आत्मघाती कदम

पूरा मामला तब गरमाया जब 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नगर सैनिक संतोष पटेल ने प्रताड़ना से तंग आकर कलेक्टर कार्यालय परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालत में उन्हें रायपुर एम्स (AIIMS) रेफर किया गया है। संतोष पटेल ने अपने सुसाइड नोट में जिला सेनानी पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना और डराने-धमकाने के आरोप लगाए थे।

मुख्यालय का आदेश: रायपुर संबद्ध किए गए एक्का

बढ़ते तनाव और सुरक्षा व्यवस्था ठप्प होने की स्थिति को देखते हुए होमगार्ड मुख्यालय ने तत्काल आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार:

अनुज कुमार एक्का: इन्हें तत्काल प्रभाव से कोरबा से हटाकर केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, माना कैंप (रायपुर) में संबद्ध किया गया है।

योग्यता साहू: जांजगीर-चांपा की जिला सेनानी सुश्री योग्यता साहू को कोरबा जिले के प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

प्रमुख मांगें जिन पर बनी सहमति

मंगलवार सुबह से ही नगर सैनिक जिला सेनानी कार्यालय परिसर में बेमियादी धरने पर बैठ गए थे। जवानों की मुख्य मांगें निम्नलिखित थीं:

1.प्रताड़ना के आरोपी जिला सेनानी का तत्काल तबादला। 2.बर्खास्त जवान संतोष पटेल की ससम्मान बहाली। 3.प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करना।

प्रशासन की ओर से संतोष पटेल को एक सप्ताह के भीतर बहाल करने का ठोस आश्वासन दिया गया है, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

थम गई थी सुरक्षा व्यवस्था

हड़ताल के कारण कोरबा जिले के छात्रावासों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न आरक्षी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। जवानों का आरोप था कि जिला सेनानी लंबे समय से महिला सैनिकों और अन्य कर्मचारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार कर रहे थे।

 संतोष पटेल द्वारा लिखे गए पत्र में यह भी जिक्र है कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें “नेतागिरी” करने का उलाहना देकर मानसिक रूप से और अधिक दबाया गया।

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