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कर्तव्य पथ पर गूंजा छत्तीसगढ़ का शौर्य: ‘भूमकाल’ विद्रोह के नायक और देश के पहले डिजिटल म्यूजियम की दिखी अद्भुत झलक , विदेशी मेहमानों ने बढ़ाया उत्साह

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नई दिल्ली  26जनवरी ( विशेष संवाददाता ): 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी सांस्कृतिक भव्यता और गौरवशाली इतिहास से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस वर्ष राज्य ने ‘अटल नगर (नवा रायपुर) में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय’ को अपनी थीम बनाया, जो प्राचीन शौर्य और आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ संगम साबित हुआ।

वीर गुंडाधुर और भूमकाल विद्रोह का दिखा पराक्रम

झांकी के अग्र भाग ने दर्शकों को इतिहास के पन्नों में ले जाकर 1910 के ऐतिहासिक ‘भूमकाल विद्रोह’ की याद दिलाई। धुर्वा समाज के महान योद्धा वीर गुंडाधुर की वीरता को जीवंत रूप में दर्शाया गया। झांकी में विद्रोह के पारंपरिक प्रतीक— ‘आम की टहनियाँ और सूखी मिर्च’—को विशेष स्थान दिया गया, जो अंग्रेजों के खिलाफ जनजातीय एकजुटता का संदेश थे। यह वही विद्रोह था जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।

अश्व पर सवार शहीद वीर नारायण सिंह का ओज

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह को अश्व पर सवार, हाथ में नंगी तलवार लिए बेहद ओजस्वी रूप में दिखाया गया। 1857 के गदर में उनकी अग्रणी भूमिका और अकाल पीड़ितों के लिए उनके संघर्ष की गाथा को इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय मंच पर फिर से जीवंत कर दिया।

डिजिटल विजन और सांस्कृतिक विरासत

झांकी का मध्य भाग देश के उस पहले आदिवासी डिजिटल संग्रहालय को समर्पित था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की रजत जयंती पर किया था। इसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय आंदोलनों को डिजिटल माध्यम से संरक्षित किया गया है। झांकी के साथ चल रहे नर्तक दलों की थाप और लोक-धुनों ने पूरे वातावरण को ‘छत्तीसगढ़िया’ रंग में सराबोर कर दिया।

अतिथियों ने बढ़ाया कलाकारों का मान

जब यह झांकी सलामी मंच के सामने से गुजरी, तो मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दांतों तले उंगली दबा ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तालियाँ बजाकर और हाथ हिलाकर छत्तीसगढ़ी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।